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Monday, July 26, 2021

निष्ठा ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए दीक्षा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन


वर्ष 2021 - 22 में समग्र शिक्षा के अंतर्गत माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-12) तक के सभी राजकीय एवम अशासकीय विद्यालयों के सहायक अध्यापकों, प्रवक्ताओं, प्रधानाध्यापको और प्रधानाचार्यों का सेवारत प्रशिक्षण NISTHA कार्यक्रम के अंतर्गत ऑनलाइन मोड से 1 अगस्त 2021 से फरवरी 2022 तक चरणबद्घ तरीके से सम्पन्न किया जाना है।

nishtha online training



 

यह प्रशिक्षण भारत सरकार के दीक्षा प्लेटफॉर्म पर होना है जिसको आप नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं।

 diksha.app

दीक्षा app डाउनलोड करने के बाद आपको अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा जिसमें आपको निम्न जानकारी भरनी होंगी-
mobile number
gmail id
ट्रेजरी कोड
पासवर्ड जो आपको बनाना है और सेव रखना है।

आप रजिस्ट्रेशन की जानकारी के लिए नीचे दिए हुए लिंक पर क्लिक करके वीडियो देख सकते हैं जिसमें रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया दी गयी है- 

diksha portal registration


nishtha online training


रजिस्ट्रेशन के लिए चरण इस प्रकार से होंगे-

  सबसे पहले दीक्षा app डाउनलोड करना है।

आगे इस प्रकार से रजिस्टर कर सकते हैं- 

  1. अपने मोबाइल में Diksha App open करे। 
  2. अपने मनपसंद भाषा का चयन करे - Hindi या English या अन्य और जारी रखें बटन दबाये। 
  3. अब Teacher/शिक्षक सेलेक्ट करें। 
  4. अपने बोर्ड का चुनाव करे - उदहारण के लिए - State उत्तराखण्ड एवं दाखिल करे बटन दबाये। 
  5. अब माध्यम चुने - Hindi / English / Other जो आप चुनना चाहे और दाखिल करे बटन दबाये।
  6. अब कक्षा का चुनाव करे - आप जिस भी कक्षा से संबंधित हैं। और दाखिल करे बटन दबाये। 
  7. अब तक आपका Self - Enrolment का कार्य पूर्ण हो गया है। अब आप स्क्रीन पर X (Close) चयन करे या सबसे नीचे "पाठ्यपुस्तक चुनकर शुरुआत कीजिए" ऑप्शन पर क्लिक कर Dashboard पर जाएँ। 
  8. Dashboard में नीचे दाएँ कोने में Profile (प्रोफाइल) पर क्लिक करें।  
  9. अब प्रोफाइल विवरण पेज खुलेगा जिसमें नीचे जाने पर "लॉग इन करे" बटन पर क्लिक करें। 
  10. अब Log In पेज खुलेगा। यहाँ पर "Register Here" लिंक पर क्लिक करें। 
  11. अब Registration पेज खुलेगा। 
  12. रजिस्ट्रेशन पेज पर अपना जन्म तिथि के वर्ष का चयन करें। 
  13. फिर अपना सही-सही पूरा नाम दर्ज करें। फिर Mobile Number या Email Address का ऑप्शन चुनें। OTP इसी मोबाइल या ईमेल पर प्राप्त होगा। 
  14. अगले कॉलम में Password बनाये। Password कम-से-कम 8 अंक का होना चाहिए जिसमें कैपिटल लेटर, स्मॉल लेटर, कोई सिंबल, और अंक होने चाहिए। उदहारण - Riji@12345 इस प्रकार का पासवर्ड नहीं बनाने पर रजिस्ट्रेशन नहीं हो पायेगा। 
  15. पुनः अगले कॉलम में वही पासवर्ड डालकर कन्फर्म करें। 
  16. अब "I understand and accept DIKSHA Terms of use" को टिक करें।
  17.  अब Register बटन हाईलाइट हो जायेगा , इसपर क्लिक करे। (कभी-कभी Captcha Verification भी हो सकता है)
  18. Register बटन पर क्लिक करते ही OTP मांगेगा। आपके मोबाइल नंबर या ईमेल पर OTP प्राप्त हुआ होगा। दिए गए बॉक्स में OTP दर्ज करे और Submit कर दें। 
  19. अब आपका रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस पूर्ण हो गया है। आप स्वतः ही Log In पेज पर आ जायेंगे। 
  20. लॉगइन पेज पर दिए गए बॉक्स में मोबाइल नंबर या ईमेल ID डालें एवं Password डालें (जो पासवर्ड आपने रजिस्ट्रेशन के वक्त बनाया था) और "LOGIN" बटन पर क्लिक करें। 
  21. लॉगिन होने के बाद Dashboard खुलेगा। 
  22. पुनः Dashboard के नीचे दाहिने कोने में प्रोफाइल (Profile) पर क्लिक करें। 
  23. आपकी DIKSHA ID दिखेगी। इस पेज पर "विवरण दाखिल करें" ऑप्शन का चयन करें। 
  24. Teacher का चयन करें 
  25. अपना State चयन करें। 
  26. आपका विवरण खुलेगा जहाँ Mobile / Email जो आपने रजिस्ट्रेशन के वक्त दिया होगा स्वतः भरा हुआ दिखाई देगा। अगर दोनों में कोई खली रहे तो सही जानकारी डालकर OTP वेरीफाई कर लें। यहाँ मोबाइल नंबर वेरीफाई होना अत्यावश्यक है।
  27. अगला कॉलम "राज्य/बोर्ड/संस्था द्वारा अनुरोध किया गया ID" में ID ज्ञात हो तो डालें 
  28. आगे "मैं DIKSHA के एडमिन के साथ इन विवरणों को साझा करने के लिए सहमत हूँ" वाले चेक बॉक्स में टिक कर "दाखिल करें" बटन को दबायें। 
  29. आपका Diksha App Par Registration पूर्ण हो चुका है। अब आप Schedule के अनुसार Course करने के लिए तैयार हैं।


1 अगस्त से आपकी ट्रेनिंग इस app के माध्यम से शुरू हो जाएगी। आपको एक लिंक भेजा जाएगा जिस पर क्लिक करते ही आपका कोर्स खुल जायेगा।

आपको जिसमें 13 मॉड्यूल पूरे करने होंगे और उसके बाद क्विज पास करने के लिए 70% मार्क्स लाना अनिवार्य होगा।



अन्य किसी भी तकनीकी समस्या के लिए आप निम्न मोबाइल no पर सम्पर्क कर सकते हैं।

ऊखीमठ ब्लॉक-
१.पंकज भट्ट -74093 15392
२.मनीष जी-9639201999

जखोली-
१.पीयूष शर्मा-97563 86309
२.अमृता नौटियाल-7251964461

अगस्त्यमुनि-
1.रविन्द्र पंवार -9412364431
2.राजीव लोचन- 97565 33547
3.आनन्द सिंह नेगी-9760859660

रुद्रप्रयाग डाइट-
डॉ0 विनोद कुमार यादव-94115 81166
डॉ0 डी0 पी0 सती-9639165154
श्री अनिल चौकियाल-96905 77630







Tuesday, January 12, 2021

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद(NCTE)


भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा मई 1973 में शिक्षा आयोग की अनुशंसा पर  गैर संवैधानिक संस्था के रूप में  राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की स्थापना की गई।

शुरुआती चरण में इसका कार्य केंद्र व राज्य सरकारों को शिक्षक शिक्षा से जुड़े मामलों में सलाह देना था।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 और कार्य योजना 1996 की अनुशंसा के आधार पर राष्ट्रीय शिक्षा अधिनियम परिषद 1993 के अधीन राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद एक संवैधानिक निकाय के रूप में 17 अगस्त 1995 से अस्तित्व में आया।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की  चार क्षेत्रीय समितियां हैं -
पूर्वी क्षेत्रीय समिति भुवनेश्वर उड़ीसा
 पश्चिमी क्षेत्रीय समिति भोपाल 
उत्तर क्षेत्रीय समिति जयपुर 
दक्षिण क्षेत्रीय समिति बेंगलुरु कर्नाटक में

 इस परिषद के प्रमुख कार्य अध्यापक शिक्षा के स्तर को विकसित करने हेतु अनुदान की व्यवस्था करना इसके लिए एक टीम नियुक्त की जाती है ।

 शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों के बारे में उपयुक्त योजनाएं और कार्यक्रमों को तैयार करता है।

राष्ट्रीय स्तर राज्य स्तर पर शिक्षण संस्थाओं तथा शिक्षा विभाग के स्तर के शैक्षिक शोध कार्यों में समन्वय स्थापित करना।

 सभी स्तरों के केंद्रीय तथा राज्य प्राथमिक स्तर तथा महाविद्यालय स्तर के अध्यापक शिक्षा की व्यवस्था का निरीक्षण करना तथा उनके विकास एवं सुधार हेतु साधनों का सुझाव देना।

 पाठ्यक्रम स्टाफ साधनों सुविधाओं के संदर्भ में राष्ट्रीय स्तर का निर्धारण करना।

अंतर्राज्यीय स्तरों  के लिए निरीक्षण करना मूल्यांकन करना विकास एवं प्रसार का अवलोकन करना।


 अध्यापक शिक्षा के पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करना अध्यापकों की सामाजिक व्यवस्था को सुनिश्चित करना तथा अध्यापक शिक्षा के भावी कार्यक्रम तैयार करना है।

मान्यता प्राप्त संस्थानों की पहचान करता है और शिक्षक शिक्षा प्रणाली के विकास कार्यक्रमों के लिए नए संस्थानों की स्थापना करता है।

अध्यापक शिक्षा से संबंधित निम्न शोध पत्रिकाओं का प्रकाशन होता है
 इंडियन जर्नल आफ टीचर एजुकेशन 
अन्वेषिका 
अध्यापक साथी 



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Monday, January 11, 2021

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद NCERT


NCERT का पूरा नाम NATIONAL COUNCIL OF EDUCATIONAL RESEARCH AND TRAINING है।


इस परिषद की स्थापना  1 सितम्बर 1961 में की गई।


विद्यालयी शिक्षा में आवश्यक सुधार के लिए एनसीईआरटी की स्थापना की गई।


NCERT विद्यालयी शिक्षा से जुड़े मामलों पर केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों को सलाह देने का कार्य करती है।



एनसीईआरटी के संगठन में केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत 12 सदस्य होते हैं, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति,अध्यक्ष केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, प्रत्येक राज्य का एक-एक प्रतिनिधि और भारत सरकार का शैक्षिक सलाहकार होते हैं।


 इसके चार क्षेत्रीय महाविद्यालय अजमेर मैसूर भुवनेश्वर और भोपाल में है।
 इसका मुख्यालय दिल्ली में है जिसके कई विभाग हैं इसमें केंद्र भी स्थापित किए गए हैं ।




इस परिषद के मुख्य कार्य -

 प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की शिक्षा के सुधार हेतु शोध कार्य और शोध कार्यों को अनुदान देना।
शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता लाना।
 सेवारत अध्यापक और पूर्व सेवा अध्यापकों को नेतृत्व प्रदान करना।
 नवीन परिवर्तनों और आयामों से अवगत कराना और प्रशिक्षण देना।
शिक्षण की उच्च तकनीकी को प्रोत्साहित करना।
 प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की शिक्षा संबंधित कार्यों के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाती हैं।
1 से 12 तक की पुस्तकें तैयार करने का कार्य NCERT द्वारा किया जाता है।

विद्यालयों में विज्ञान किट NCERT द्वारा तैयार की जाती है।


 एनसीईआरटी के क्षेत्र-
 एनसीईआरटी के अध्यापक शिक्षा विभाग के मुख्य क्षेत्र इस प्रकार से है 
प्राथमिक तथा माध्यमिक स्तर के लिए विद्यालय अनुभव हैंडबुक विभाग।

 प्राथमिक स्तर के अध्यापक शिक्षा के कौशल पर आधारित पाठ्यक्रम विभाग।

 अध्यापक शिक्षा की प्रवेश प्रक्रिया हेतु  विभाग।

 अध्ययन सामग्री विभाग अध्यापक शिक्षा विभाग द्वारा सेवारत अध्यापकों को प्रशिक्षण एवं प्रसार की भी व्यवस्था की जाती है ।

 प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की कार्यशाला सेमिनार वार्षिक सम्मेलन इत्यादि की व्यवस्था करना है।


Sunday, January 10, 2021

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग UNIVERSITY GRANTS COMMISSION

 


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का गठन 28 दिसंबर 1953 को भारत सरकार द्वारा किया गया।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग केंद्रीय सरकार का आयोग है जो विभिन्न विश्वविद्यालयों को मान्यता देता है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का गठन विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग 1948-49 की सिफारिश पर किया गया तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद थे।

यूजीसी का बोध वाक्य है ज्ञान विज्ञान विमुक्तये।

 भारत सरकार ने इसे 1956 में स्वायत्त संस्था का दर्जा दिया।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का मुख्य कार्यालय दिल्ली में है तथा 6 क्षेत्रीय कार्यालय पुणे ,भोपाल, कोलकत्ता,  हैदराबाद ,गुवाहाटी और बेंगलुरु में स्थित हैं।

आयोग में अध्यक्ष उपाध्यक्ष तथा भारत सरकार द्वारा नियुक्त 10 अन्य सदस्य होते हैं।


यूजीसी के अध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष होता है।

 डॉ 0 शांति स्वरूप भटनागर यूजीसी के पहले अध्यक्ष थे।


विभिन्न प्रकार के विश्वविद्यालय जो यूजीसी द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं केंद्रीय विश्वविद्यालय 54, राज्य विश्वविद्यालय 416, डीम्ड 124,प्राइवेट विश्वविद्यालय 364।
कुल विवि 958।

उत्तराखण्ड में 7 October 2020 को UGC ने 24  विश्वविद्यालय को अवैध( fake )विश्वविद्यालय बताया था।


उत्तराखंड में यूजीसी से मान्यता प्राप्त केंद्रीय विश्वविद्यालय 1,राज्य विश्वविद्यालय 11,प्राइवेट 18 
कुल विश्वविद्यालय- 33



विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अनुदान आयोग के प्रमुख कार्य-
 विश्वविद्यालय के विकास तथा संचालन हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करना।


नए विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए राज्य को परामर्श देना और 5 वर्ष के संचालन का संपूर्ण व्यय वहन करना।

 
केंद्रीय विश्वविद्यालय को विकास और संचालन हेतु सम्पूर्ण व्यय के लिए अनुदान देना तथा राज्य के विश्वविद्यालयों के विकास हेतु अनुदान देना।

विश्वविद्यालय स्तरीय शिक्षा उच्च शिक्षा में छात्रों हेतु कार्य योजना तैयार करना और क्रियान्वयन हेतु संबंधित संस्थानों को परामर्श प्रदान करना।


 अध्यापकों के आवास हेतु विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालयों को अनुदान दिया जाता है।


 विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में समानता बनाए रखना तथा उनके बीच समन्वय स्थापित करना।


यूजीसी द्वारा शिक्षा में सुधार के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं बनती हैं।




UGC के वर्तमान अध्यक्ष-   प्रोफेसर धीरेंद्र पाल सिंह।

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Friday, January 8, 2021

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 NATIONAL EDUCATION POLICY


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 से पूर्व कांग्रेस सरकार ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में 1968  राष्ट्रीय शिक्षा नीति घोषित की थी।

 इसके पश्चात राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनने पर सरकार ने शिक्षा का सर्वेक्षण करवाया और उसे शिक्षा की चुनौती नीति संबंधी परिपेक्ष  नाम से अगस्त 1983 में प्रकाशित किया।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति दस्तावेज मई 1986 में प्रकाशित किया गया और इस शिक्षा नीति की घोषणा के बाद नवंबर 1986 में इसकी कार्ययोजना दस्तावेज़ प्रकाशित किया गया।

शिक्षा नीति 1986 का प्रमुख उद्देश्य था सभी को समान शिक्षा।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 का दस्तावेज 12 भागों में विभाजित है-
  1. भूमिका
  2. शिक्षा का सार तथा भूमिका
  3. राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली
  4. समानता के लिए शिक्षा
  5. विभिन्न स्तरों पर शिक्षा का पुनर्गठन
  6. तकनीकी एवं प्रबंधकीय शिक्षा
  7. प्रणाली को कार्यशील बनाना
  8. विषय सामग्री तथा प्रक्रिया का नवीनीकरण
  9. शिक्षक 
  10. शिक्षा का प्रबंधन
  11. साधन एवं  पुर्ननिरीक्षण
  12. भविष्य


शिक्षा के आधुनिकीकरण और आईटी की भूमिका की मुख्य बात इसमें कही गई।


 शिक्षा का पुनर्गठन बचपन की देखभाल महिला सशक्तिकरण और वयस्क साक्षरता पर अधिक ध्यान दिया गया ।


राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली पूरे देश में लागू करने की बात कही गई 10 + 2+ 3 शिक्षा संरचना लागू की जाए।


 शिक्षा का विकेंद्रीकरण किया जाए केंद्र में भारतीय शिक्षा  सेवा, प्रांत में प्रांतीय शिक्षा सेवा और जिले में जिला शिक्षा परिषद की स्थापना की जाए।

 कुल बजट का 6% शिक्षा के लिए तय करने का प्रावधान रखा जाए।


 सभी स्तरों का पुनर्गठन किया जाए प्रारंभिक शिक्षा, निरौपचारिक शिक्षा, ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड लागू करने की बात कही गई ।


Operation black board के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों की न्यूनतम आवश्यकताओं दो कमरों का भवन ,फर्नीचर,शिक्षण सामग्री,पुस्तकालय सामग्री ,खेल सामग्री कम से कम 2 शिक्षक प्रत्येक विद्यालय में नियुक्त होने चाहिए।


 माध्यमिक शिक्षा बोर्ड माध्यमिक शिक्षा में सुधार तथा नवोदय विद्यालय की स्थापना की पूरी रूपरेखा प्रस्तुत की गई ।


नए  मुक्त विश्वविद्यालयों की स्थापना का सुझाव रखा गया और इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय की कार्यक्रमों की विस्तार की बात कही गई।


(इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना 1985 में हुई थी )।

देश में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद तथा राज्य में तकनीकी शिक्षा परिषद बोर्ड को सुदृढ़ करने की बात कही गई ।

1990 तक प्राथमिक शिक्षा को सर्व सुलभ बनाए जाने की बात कही गई जिसमें 1 किलोमीटर के अंतर्गत 1 प्राथमिक स्कूल खोले जाने की बात कही गई।

 1995 तक 11 से 14 आयु वर्ग के बच्चों के लिए शत प्रतिशत सुलभ शिक्षा की बात कही गई।


 1995 तक व्यवसायिक वर्ग में 25% छात्र छात्राओं छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर पाएंगे ऐसी बात कही गई।


  प्रत्येक जिले में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डाइट की स्थापना की गई जाएगी।


इसके पश्चात नई सरकार के आते ही प्रधानमंत्री श्री विष्णु प्रताप सिंह ने 1990 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की जिसके अध्यक्ष आचार्य राममूर्ति थे। आचार्य राममूर्ती  समिति 1990।



जिसका प्रमुख कार्य था 1986 की नीति की समीक्षा करना संशोधन हेतु सुझाव देना संशोधित नीति का क्रियान्वयन हेतु सुझाव देना।

 इसके पश्चात पुनः कांग्रेस सत्ता में आई तो 1986 में जनार्दन रेड्डी समिति 1992 में  गठित की गई।


 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में संशोधित शिक्षा नीति 1992 में लाई गई।

operation blackboard योजना  प्राथमिक  स्तर पर 1987 में लागू की गई।

 operation blackboard योजना उच्च प्राथमिक स्तर पर 1992 में लागू की गई।



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Thursday, January 7, 2021

राष्ट्रीय शिक्षा आयोग(कोठारी कमीशन) 1964-66 NATIONAL EDUCATION COMMISSION

 


देशभर में एक समान शिक्षा नीति का निर्माण करने के उद्देश्य से 14 जुलाई 1964 को राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का गठन किया गया।

आयोग के अध्यक्ष डॉ0 दौलत सिंह कोठारी (तत्कालीन अध्यक्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग)।

कुल सदस्य संख्या 17 

12 भारतीय तथा 5 विदेशी शिक्षा विशेषज्ञ थे जो इंग्लैंड,अमेरिका,फ्रांस,जापान और रूस से थे।

आयोग का कार्यक्षेत्र पूरे देश की तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कर उसमें सुधार के लिए सुझाव देना।

आयोग ने अपना प्रतिवेदन शिक्षा एवं राष्ट्रीय प्रगति 29 जून 1966 को भारत सरकार को प्रेषित किया।

इसी आयोग की सिफारिशों के फलस्वरूप 1968 की शिक्षा नीति अस्तित्व में आई।

केन्द्र सरकार शिक्षा पर बजट 6% खर्च करे।


6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों के लिए अनिवार्य पर निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जाए।

1से 3 वर्ष की पूर्व प्राथमिक शिक्षा की बात कही।


 सामान्य शिक्षा की अवधि प्राथमिक एवं माध्यमिक कुल 10 वर्ष होनी चाहिए।

विषयों का विशिष्टिकरण 10 वीं के बाद होना चाहिए।

10+2+3 शिक्षा संरचना का सुझाव दिया।


 विद्यालय संकुल ओं का निर्माण किया जाए एक संकुल में एक माध्यम के स्कूल और उसके निकटवर्ती सभी प्राथमिक स्कूल हों।


 प्रथम सार्वजनिक परीक्षा 10 वर्ष की सामान्य शिक्षा प्राप्त करने पर होनी चाहिए

 शिक्षा के पांच उद्देश्य लक्ष्य निर्धारित किए गए जिन्हें पंचमुखी कार्यक्रम कहा गया ।
 1 ) शिक्षा द्वारा उत्पादन में वृद्धि
 2 )शिक्षा द्वारा सामाजिक तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना।
 3 )शिक्षा द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास करना 
4)शिक्षा द्वारा राष्ट्र का आधुनिकीकरण करना।
 5 )शिक्षा द्वारा सामाजिक नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों का विकास करना।


केंद्र में राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा बोर्ड का और भारतीय शिक्षा सेवा का गठन किया जाए ।

प्रत्येक राज्य में राज्य विद्यालय शिक्षा बोर्ड और राज्य शिक्षा सेवा का गठन किया जाए ।

वरिष्ठ विश्वविद्यालयों की स्थापना का सुझाव दिया।


संशोधित त्रिभाषा सूत्र दिया-
 1) मातृभाषा ( क्षेत्रीय भाषा अथवा प्रादेशिक भाषा) 
2 ) संघ की भाषा हिंदी अथवा अंग्रेजी 
3) कोई आधुनिक भारतीय भाषा या कोई आधुनिक यूरोपीय भाषा या कोई शास्त्रीय भाषा जो प्रथम दो में न ले गई हो।

सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष स्वस्थ एवं कर्मठ व्यक्तियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष बढ़ाई जा सकती है।


 व्यक्तिगत ट्यूशन पर नियंत्रण किया जाए।


प्राथमिक शिक्षकों के प्रशिक्षण की अवधि 2 वर्ष होनी चाहिए और माध्यमिक शिक्षकों के प्रशिक्षण की अवधि फिलहाल 1 वर्ष रहे किंतु आगे चलकर इसे भी 2 वर्ष कर देना चाहिए।

 1 वर्ष में कार्य दिवसों की संख्या कम से कम 230 दिन हो।


 केंद्र में राष्ट्रीय प्रौढ़ शिक्षा बोर्ड राज्य में राज्य प्रौढ़ शिक्षा बोर्ड की स्थापना की जानी चाहिए 15 से 30 आयु वर्ग के निरक्षर प्रोढो की शिक्षा व्यवस्था के लिए प्राथमिक विद्यालयों को सामुदायिक से केंद्र बनाया जाना चाहिए।

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Tuesday, January 5, 2021

माध्यमिक शिक्षा आयोग मुदालियर कमीशन 1952-53 SECONDARY EDUCATION COMMISSION



केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड ने 1951 में केंद्र सरकार के सामने माध्यमिक शिक्षा आयोग की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा।


 माध्यमिक शिक्षा आयोग का गठन 23 September 1952

आयोग के अध्यक्ष मद्रास विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ0 लक्ष्मणस्वामी मुदालियर।

अध्यक्ष सहित कुल सदस्य 10।
 अन्य प्रमुख सदस्य- 
डॉ0 के0एन0श्रीमाली 
श्री के0जी0 सैयदेन 
श्रीमती हंसा मेहता 
श्री जॉन क्राइस्ट 
श्री कैथन रस्ट विलियम्स

आयोग ने रिपोर्ट प्रस्तुत की 29 अगस्त 1953


आयोग की नियुक्ति का उद्देश्य तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा की स्थिति का पता लगाना और पुनर्गठन के संबंध में सुझाव देना।


माध्यमिक शिक्षा के उद्देश्य -
जनतांत्रिक नागरिकता का विकास
 व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास 
व्यवसायिक कुशलता में वृद्धि और नेतृत्व विकास।

 माध्यमिक शिक्षा आयोग ने सुझाव दिया कि केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की तरह प्रत्येक प्रांत में प्रांतीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की स्थापना की जाए ।

प्रत्येक प्रांत में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का गठन किया जाए जिसके पदेन अध्यक्ष शिक्षा निदेशक(कार्य - शिक्षा मंत्री को सलाह देना) होंगे।


तकनीकी शिक्षा के लिए प्रत्येक प्रान्त में तकनीकी शिक्षा बोर्ड स्थापित किया जाए जो All india council for technical education के निर्देशन में कार्य करे।



वित्त व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रांतीय सरकारों की परंतु केन्द्र सरकार को मदद करनी चाहिए ।


माध्यमिक स्कूलों को दिया जाने वाला दान आयकर से मुक्त होगा भूमि की नि:शुल्क व्यवस्था।

तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था के लिए उद्योगों पर कर लगाया जाए ।


 प्रत्येक विद्यालय में निश्चित समय अन्तराल  से निरीक्षण होना चाहिए निरीक्षण मंडल में विद्यालयों के निरीक्षक, माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य , शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों के अनुभवी अध्यापक।

माध्यमिक शिक्षा 11 से 17 वर्ष के बालक बालिकाओं के लिए 3 वर्ष निम्न माध्यमिक 4 वर्ष उच्च माध्यमिक की कक्षायें चलेंगी।

इण्टरमीडिए को समाप्त कर 11 वीं को माध्यमिक 12 वीं को डिग्री में जोड़ दिया जाए । डिग्री कोर्स 3 वर्ष का होगा।


बहुउद्देशीय विद्यालय खोले जायेंगे।

निवास विद्यालयों की व्यवस्था। छात्राओं के लिए गृहविज्ञान के अध्ययन की सुविधा की जाएगी ।

बड़े शहरों में पोलीटेक्नीक खोले जाएं ।


ग्रामों में स्थापित माध्यमिक विद्यालयों में कृषि शिक्षा के साथ पशुपालन बागवानी तथा कुटीर उद्योगों की शिक्षा दी जानी चाहिए ।


प्रत्येक राज्य में दृष्टिहीन बाधिर तथा मूक आदि बाधितों की  शिक्षा का प्रबंध किया जाना चाहिए ।


मूल्यांकन अंकों में नहीं बल्कि ग्रेड सिस्टम होना चाहिए । वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं की व्यवस्था।

अनुशासन के लिए 17 वर्ष से कम आयु के बालकों को राजनीति में भाग लेने नहीं दिया जाएगा ।


आवश्यकतानुसार बालिका विद्यालय खोले जाएं जहाँ सम्भव न हो सह शिक्षा की व्यवस्था की जाए । बालिकाओं को किसी भी प्रकार की शिक्षा प्राप्त करने का समान अधिकार ।


नैतिक और धार्मिक शिक्षा अध्ययन से पूर्व या बाद में किसी को बाध्य न किया जाए ।

मिडिल स्चूलों में कम से कम दो भाषाओं की शिक्षा शिक्षा का माध्यम मातृभाषा या प्रादेशिक भाषा । अंग्रेजी अनिवार्य विषय रहने दिया जाए । हिन्दी अनिवार्य विषय बनाया जाए ।


कार्यदिवस 200 तथा 2 माह का ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन अवकाश।


शिक्षकों की शिकायतों पर विचार के लिए आर्बिटेशन बोर्ड बनाया जाए।

सेवानिवृति आयु 58 के स्थान पर 60 कर दी जाए।


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Monday, January 4, 2021

विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग (1948 -49) Radhakrishnan Commission University Education Commission


स्वतंत्र भारत का पहला शिक्षा आयोग - विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग।


विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के निर्माण का सुझाव  भारत सरकार को केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड और अंतर्विश्वविद्यालय शिक्षा परिषद के द्वारा दिया गया।

 विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की नियुक्ति-4 नवंबर 1948


आयोग के अध्यक्ष डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन।

 कुल 10 सदस्य -

डॉ0 लक्ष्मणस्वामी मुदालियर 
आर्थर मॉर्गन
डॉ0 सर जेम्स 
 डॉक्टर जान टिजर्ट 
डॉक्टर जाकिर हुसैन
 डॉक्टर ताराचंद
 डॉक्टर मेघनाथ साहा 
 डॉक्टर कर्म नारायण बहल
 श्री निर्मल कुमार सिद्धांत आयोग के सचिव

 
रिपोर्ट प्रस्तुत की 25 अगस्त 1949।

 विश्वविद्यालय शिक्षा का उद्देश्य-
 युवकों में नेतृत्व क्षमता का विकास
 जनतांत्रिक सफल प्रणाली
 विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार 

विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने सुझाव दिया कि शिक्षा को समवर्ती सूची में रखा जाए ।
(शिक्षा को समवर्ती सूची में 42 वें संविधान संशोधन के तहत 1976 में रखा गया) 

वित्तीय भार केंद्र और प्रांतीय सरकारें दोनों मिलकर उठाएंगे।


 विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने  महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय अनुदान समिति के स्थान पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी का गठन किया जाएगा।
(UGC की स्थापना 1953 में हुई और इसको 1956 में स्वायत्त संस्था का दर्जा दिया गया ।)

 विश्वविद्यालय का संगठन-
स्नातक (graduation)3 वर्ष का 
स्नातकोत्तर( post graduation)2 वर्ष का 
अनुसंधान न्यूनतम 2 वर्ष का होगा।


तीन वर्ग -
कला,विज्ञान और व्यवसायिक तकनीकी ।


ग्रामीण विश्वविद्यालय खोलने की सिफारिश की गई साथ ही उच्च शिक्षा और शोध कार्य के लिए कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की बात कही गई ।




व्यवसायिक एवं तकनीकी शिक्षा के 6 वर्ग -
कृषि
वाणिज्य
इंजीनियरिंग एवं तकनीकी
चिकित्सा
कानून 
शिक्षक प्रशिक्षण 



पाठ्यक्रम में व्यापकता और लचीलापन लाने की बात की गई।

 स्त्री शिक्षा के लिए सह शिक्षा को प्रोत्साहन देने की बात कही गई और स्त्रियों के लिए स्त्री उचित शिक्षा की बात कही गई।

 ग्रामीण विश्वविद्यालय की बात की गई तठा अखिल भारतीय स्तर पर एक ग्रामीण शिक्षा परिषद की स्थापना ।


छात्र कल्याण के लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड प्रशासन में प्रशिक्षण की स्थापना की बात कही गई।


 प्राथमिक माध्यमिक और उच्च शिक्षा में कृषि को एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में सम्मिलित किया जाना चाहिए।

 कृषि स्कूल कॉलेज तथा फॉर्म ग्रामीण अंचलों में खोले जाने चाहिए।


चिकित्सा शिक्षा के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण होना चाहिए अधिकतम छात्र संख्या 100 और प्रत्येक छात्र के लिए 10 रोगी होने चाहिए ।


मूल्यांकन और परीक्षा के लिए परीक्षा को 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए।

 स्नातकोत्तर एवं व्यवसायिक परीक्षा में मौखिक परीक्षा का आयोजन भी किया जाना चाहिए।

 इसके लिए मूल्यांकन के लिए 3 सदस्य एक पूर्णकालिक बोर्ड की स्थापना का सुझाव दिया साथ ही वस्तुनिष्तठ  परीक्षाएं और पाठ्यक्रम में संशोधन की बात कही गई।

कार्य दिवस 180 होना चाहिए जो कि परीक्षा को छोड़कर होने चाहिए ।

विश्व विद्यालयों में विद्यार्थियों की अधिकतम संख्या 3000 और संबंध कॉलेजों में 1500 से अधिक नहीं होना चाहिए।


 विश्वविद्यालय में 18 वर्ष की आयु हो जाने पर ही प्रवेश दिया जाना चाहिए।

मूल्यांकन की श्रेणियां प्रथम श्रेणी 70% द्वितीय श्रेणी 55% और तृतीय श्रेणी 40% निर्धारित होनी चाहिए।

शिक्षकों की 4 श्रेणियाँ-
प्रोफेसर
रीडर
लेक्चरार
इंस्ट्रक्टर 

अध्यापकों व अधिकारियों में विवाद सुलझाने के लिए न्यायधीश की नियुक्ति।

सेवानिवृति आयु-60/64

अध्ययन के लिए अवकाश 1 बार में 1 वर्ष और पूरे सेवाकाल में 3 वर्ष।

अध्यापन कार्य सप्ताह में अधिकतम् 18 घण्टे।

ग्रामीण उच्च शिक्षा समिति की स्थापना- 1954

NSS की स्थापना 24 सितम्बर 1969

NCC  की स्थापना 16 जुलाई 1948

 
देश का प्रथम ग्रामीण विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश 1991 में स्थापित किया गया - महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय।


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धन्यवाद।।









Friday, September 25, 2020

नई शिक्षा नीति 2020 : समतामूलक और समावेशी शिक्षा के प्रावधान


नई शिक्षा नीति 2020 में समतामूलक और समावेशी शिक्षा : सभी के लिए अधिगम विषय को समझने के उद्देश्य से जिला  शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान  रतूड़ा रुद्रप्रयाग द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 पर चर्चा के लिए राज्य स्तरीय वेबीनार  निदेशक एआरटी उत्तराखंड  श्रीमती सीमा जौनसारी के  निर्देशन एवं  डायट प्राचार्य श्री एस0 एस0 असवाल जी  के मार्गदर्शन मेें  23 सितम्बर 2020 को आयोजित किया गया।

                        श्रीमती सीमा जौनसारी 
               निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण

वेबिनार में राज्य भर से कुल 524 विशेषज्ञों,शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।  वेबीनार का संचालन डायट रतूड़ा की वरिष्ठ प्रवक्ता श्रीमती भुवनेश्वरी चंदानी जी द्वारा किया गया।

जिसके संयोजक डॉ0 विनोद कुमार यादव, श्रीमती भुवनेश्वरी चंदानी, डॉ0 जी0 पी0 सती थे।  
जिसमें  पूरे देश भर से गणमान्य व्यक्ति जुड़े जिनमें से डॉ0 पंकज सिंह एसोसिएट प्रोफेसर दीनबंधु कॉलेज यूनिवर्सिटी दिल्ली जो की प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी हैं जो अंटार्कटिका मिशन पर भारत की तरफ से रहे, डॉ0 विनोद नौटियाल, योग विभाग एचएनबी केन्द्रीय विश्वविद्यालय , डॉ0 हेमलता यादव बी एम कॉलेज इंदौर HOD एजुकेशन डिपार्टमेंट सहित कई गणमान्य  व्यक्तियों की गरिमामय उपस्थिति रही।

सर्वप्रथम  श्रीमती भुवनेश्वरी चंदानी के द्वारा सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का परिचय कराया गया और कार्यक्रम की रूप रेखा प्रस्तुत की गई।
तत्पश्चात आमंत्रित किया गया प्राचार्य डायट रतूडा जिन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन किया।
श्री 0 एस0 एस0 असवाल  डायट प्राचार्य रतूड़ा रुद्रप्रयाग 




  कार्यक्रम की रूपरेखा-




श्रीमती सीमा जौनसारी  निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखंड देहरादून के द्वारा सभी को संबोधित करते हुए अपने विचार रखे गए और सभी को उत्तराखंड सरकार के प्रयासों से परिचित कराया।
जौनसारी मैम ने बताया कि समाज में बालक और बालिकाओं के बीच बहुत ज्यादा भेदभाव है।इसके लिए एक अवेयरनेस कैंपेन चलाने की आवश्यकता है।

 जैसा कि साक्षरता के बारे में सभी जानते हैं कि उत्तराखंड देश में तीसरे स्थान पर है जो कि राज्य के लिए बहुत ही गौरव का विषय है।
 इसके अलावा बालिका और बालकों  के बीच होने वाले लिंग भेद दूर करने  के लिए उत्तराखंड राज्य में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय  वह बहुत ही कारगर भूमिका  निभा रहे हैं ।
 यहां पर जो हॉस्टल हैं उनकी स्थिति बहुत अच्छी है इनमें  से अधिकतम हॉस्टलों में 100 % बालिकाओं के प्रवेश  हैं ।
 12 वीं तक बालिका शिक्षा को लेकर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बहुत ही बेहतरीन कार्य हो रहा है ।यहां से बालिकाएं विभिन्न प्रतियोगिताओं में  प्रतिभाग करती हैं और स्थान प्राप्त भी करती हैं जो कि पूरे राज्य भर के लिए गौरव का विषय है।  इस तरह से उन्होंने
समानता और समता को लेकर अपने विचार प्रकट किए।

इसके पश्चात्  प्रोफेसर अमरेंद्र प्रसाद बेहरा जी, संयुक्त निदेशक राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद नई दिल्ली द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 के 27 चैप्टर में से अध्याय 6 की  विस्तृत चर्चा की।
           प्रो0 अमरेंद्र प्रसाद बेहरा संयुक्त निदेशक
                           NCERT Delhi

समता और समानता पर दिव्यांग बच्चों,लिंग असमानता ,संस्कृति से जुड़े परिचय और भौगोलिक परिचय को लेकर उन्होंने विस्तार से अपने विचार रखे ।
इसके अलावा  सोशियो इकोनामिक कंडीशन के तहत जो बच्चे आते हैं और जिन बच्चों को चुराकर ले जा लिया जाता है, जो भीख मांगने वाले बच्चे हैं ,अनाथ बच्चे हैं इन सभी के बारे में शिक्षा नीति किस तरह से संवेदनशील है और उनको मुख्यधारा में लाने का प्रयास है इस पर उन्होंने बात रखी।
 
SEDGs की समस्याओं को समझा जा सके और और हायर एजुकेशन तक उनका ध्यान दिया जा सके। इसके लिए जो स्पेशल एजुकेशन जोन है वहां के बच्चों के लिए उनके समय के अनुसार शिक्षा की व्यवस्था  की जाए और  इसके अलावा बच्चों के लिए स्कॉलरशिप की बात शिक्षा नीति में की गई है।

 उनके लिए काउंसलिंग की विशेष व्यवस्था की गई है और उत्तराखंड में कस्तूरबा गांधी विद्यालय जिसमें 
उत्तराखंड में एक बेहतरीन कार्य किया जा रहा है,उस पर उन्होंने सभी को बधाई दी ।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार से कस्तूरबा गांधी और नवोदय विद्यालयों का विस्तार किया जाएगा ।मुख्य रूप से यह स्पेशल एजुकेशन जोन में होंगे जहां पर बच्चों को इतनी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों में भी बच्चों का ध्यान रखा जाएगा।
बच्चों का शिक्षण अधिगम स्तर एक जैसा हो उनकी विभिन्नता इसमें आगे ना आए इसके लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे ।
समानता का अधिकार की बात उन्होंने कही और साथ ही  बालिकाओं की शिक्षा के लिए एक विशेष व्यवस्था की बात की।
  
दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष टेक्नॉलोजी और डिवाइस उपलब्ध हों।उनके लिए ऑडियो विजुअल ऐड्स  विद्यालय में उपलब्ध  हों।
 प्रत्येक वर्ष 50 घंटे शिक्षकों को अनिवार्य रूप से
 प्रशिक्षण दिया जाएगा। 
चैप्टर 23 और 24 की बात उन्होंने की जिसमें तकनीकी शिक्षा का समावेश ऑनलाइन डिजिटल  माध्यम का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो ।

पहाड़ों में जिस प्रकार से कनेक्टिविटी की दिक्कत होती है उसकी उसके लिए रेडियो और टीवी एक बेहतरीन विकल्प है  जिसकी पहुंच लगभग सभी 
तक है।

इसमें उन्होंने कहा कि नेशनल टेक्नोलॉजी एजुकेशन फोरम की बात नई शिक्षा नीति में की गई है जो राज्य सरकार को गाइड करेगी कि  किस प्रकार से टेक्नोलॉजी प्रत्येक बच्चे को मदद कर सके ।

डिजिटल लिटरेसी के इस्तेमाल के बारे मेे बातचीत की जिससे बच्चा सेल्फ लअर्नर बन सके और प्रॉब्लम सॉल्वर बन सके व 21वीं सदी की कौशलों को प्राप्त कर सके। 
सभी मिलकर समेकित शिक्षा की ओर चलें । प्रधानमंत्री जी  स्किल , स्केल ,स्पीड की बात करते हैं  जिसमें कौशल विकास और वह भी बड़े पैमाने पर और रफ्तार के साथ किया जाए इस पर उन्होंने बात रखी। 

 निष्ठा कार्यक्रम में जिस प्रकार से उत्तराखंड में बढ़-चढ़कर भाग लिया गया है उसके लिए बधाई दी साथ ही आगे भी इस प्रकार के कार्यक्रमों को प्रचारित और प्रसारित करने के लिए सभी को प्रोत्साहित किया।

इस प्रकार से नई शिक्षा नीति के कई पहलुओं को उन्होंने विस्तार से बताया और और सभी को इसे समझने में मदद मिली।


      डॉ0 गुरु प्रसाद सती तकनीकी सहायक डायट रतूड़ा 


इसके पश्चात् रतूडा से डॉ0 गुरुप्रसाद सती जी द्वारा शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला गया और साथ ही समावेशी शिक्षा को किस प्रकार से राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने अध्याय 6 के तहत महत्व दिया है इस पर बातचीत की। समतामूलक और समावेशी शिक्षा के 20 बिंदुओं को सती जी द्वारा विस्तार से समझाया गया। 
नई शिक्षा नीति 2020👈 विस्तार सेे जानें।


कार्यक्रम में आगे मुख्य वक्ता डॉ0 भारती   Associate professor DEGSN, CIET-NCERT ने 
डॉ0 भारती   Associate professor DEGSN, CIET-NCERT

समता मूलक और समावेशी शिक्षा को विस्तार से समझाते हुए बताया कि इसका सर्वप्रथम उदाहरण भारतीय इतिहास में यदि देखा जाए तो पंचतंत्र की कहानियां हैं।

 उनसे इस समतामूलक और समावेशी शिक्षा की अवधारणा स्पष्ट होती प्रतीत होती है,जहां पर  राजा के बच्चों को मंदबुद्धि होने के कारण होने के कारण ज्ञान नहीं दे पा रहे थे तो उनके लिए राजा ने एक ज्ञानी पंडित रखा जिसने पंचतंत्र की कहानियां गड़ी । जिसमें उनकी रुचिओं का ध्यान रखा गया और उनकी रुचि को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम निर्मित किया गया।


 उसके बाद उन्होंने बहुत ही अच्छे से समावेशन और समानता और समता  में  अंतर को स्पष्ट किया।समानता का मतलब सब को एक नजर से देखना जबकि  समता का मतलब है पहले बच्चे की जरूरत को समझते हुए समभाव के साथ देखना।

 इसमें उन्होंने उदाहरण देते हुए बहुत अच्छे से बताया कि जैसे सरकारी विद्यालय में यूनिफार्म, टेक्सबुक और एडमिशन देते हुए सभी को समानता के भाव से देखा जाता है किंतु यदि हम बात करें विशेष आवश्यकताओं आवश्यकता वाले बच्चे की उनके लिए उसका क्या महत्व है, यह ध्यान रखना जरूरी है। 
वहां पर उनके लिए ऑडियोबुक या फिर ब्रेल लिपि में से संबंधित कुछ पुस्तकें होनी चाहिए।

   उन्होंने बताया कि जो है उसका समावेशी होना बहुत जरूरी है इसका मतलब  विद्यार्थी स्कूल में आए तो उसको वहां पर अपनापन महसूस हो।

उसको लगे मेरी परंपरा से जुड़ा है , मेरे घर जैसा है और यह विद्यालय मेरे लिए ही बना है उसका इंफ्रास्ट्रक्चर उनके अनुरूप हो।

समावेशी शिक्षा समय की सीमा से परे है। जिस पर निरंतर काम करते रहना है। सभी को सामान्य शालाओं  में लाना सिर्फ हमारा मकसद नहीं होना चाहिए ।
हम बच्चे को स्कूल तक ले आए उसके बाद  वहां से हमारा काम शुरू होता है कि उनके लिए शिक्षण अधिगम की व्यवस्था में उनका प्रतिभाग सुनिश्चित हो।

समावेशन तब होता है जब हम प्रत्येक की जरूरत के अनुसार अपने इंफ्रास्ट्रक्चर में परिवर्तन करें, अपनी व्यवस्था में बदलाव करें।
जैसे दिव्यांग बच्चों के लिए क्या हमारे पास शौचालय हैं यदि उनको कोई दिक्कत होती है तो क्या वहां पर अलार्म की व्यवस्था है ? लाइब्रेरी में ऑडियो बुक्स और साइन लैंग्वेज या फिर ब्रेल लिपि की व्यवस्था हो तो तभी हम समावेशी शिक्षा की बात कर सकते हैं।
दिव्यांगजन अधिनियम अधिकार 2016 के बारे में उन्होंने विस्तार से बताया और इसमें स्वीकृत 21 अक्षमताओं के बारे में बात की। 
 ऑटिज्म (स्वलीनता) जो सामान्य शालाओं में पढ़ने वाले बच्चों में पाई जाती है किंतु हम उसको पहचान नहीं पाते क्योंकि उसको हम प्रत्यक्ष रुप से देख नहीं सकते।
 विशेषकर यह देखा गया है कि जिन बच्चों को सुनने में दिक्कत होती है वह उनको चलने में भी दिक्कत होती है तो कई ऐसे ही ऐसी अक्षमताएं हैं जिनको हम आसानी से पहचान सकते हैं।

स्वलीनता को इस तरह से नहीं पहचाना जा सकता।ऐसे बच्चे अपने आप में ही लीन होते हैं उनको उनके नाम लेकर बुलाने की जरूरत होती है ।

उसके अलावा उन्होंने एक और पहचान बताई कि ऐसे बच्चे आपकी बात सुनते हुए भी कही और देख रहे होंगे  ऐसे 
हम उनको पहचान सकते हैं।
 इसके अलावा उन्होंने डिस्लेक्सिया, डिस्केलकुलिया के बारे में बात की।
समवेशी शिक्षा के लिए बच्चों का अपने विद्यालय में स्वागत करना होगा। विशेष शिक्षक के बारे में उन्होंने बताया कि प्रत्येक विद्यालय में नहीं हो सकते किन्तु वे शिक्षकों के हाथ जरूर मजबूत कर सकते हैं।
उनको इन सबकी जानकारी और प्रशिक्षण दिया जा सकता है ताकि एक सामान्य शिक्षक अक्षमताओं वाले  बच्चों को साथ लेकर चले और उनकी अक्षमताओं को अच्छे से समझ पाए और उनके लिए उचित व्यवस्था कर पाए।

शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम को समावेशी शिक्षा की व्यवस्था में शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। 
नई शिक्षा नीति 2020 के हर अध्याय में समावेशी शिक्षा की बात की गई है। आंगनबाड़ी से हायर एजुकेशन समानता की बात की गई है।

 जहां तक हम कस्तूरबा गांधी विद्यालयों की बात करते हैं वहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यवस्था में बदलाव किए जाने जरूरी हैं जो समावेशी शिक्षा की तरफ अपना ध्यान दे सकें ।
 यह मैंटीनेंस के दौरान भी यह ध्यान दिया जा सकता है । एक विशेष बात उन्होंने लिंग आधारित पहचान के बारे में कही लिंग असमानता को हम सिर्फ लड़कियों को लेकर सोचते हैं लड़कों के लिए भी उतना ही यह जरूरी है कि हम उनको लेकर भी लिंग असमानता को समझें।

इसके बाद मुख्य वक्ता डॉ0 नीमिरत कौर Associate professor अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी बेंगलूरु द्वारा समतामूलक और समावेशी शिक्षा को शिक्षा का आधार बताया इसी कारण से इसका उल्लेख हर अध्याय मे किया गया है।
डॉ0 नीमिरत कौर एसोसिएट प्रोफेसर APF यूनिवर्सिटी

इसके बाद एक के बाद बिन्दु को डॉ0 कौर जी द्वारा स्पष्ट किया गया।
1.  नीति के आधार सिद्धांतों को समझाया गया कि इसका उददेश्य ऐसे इंसानों का विकास है जो संविधान द्वारा परिकल्पित समाज के निर्माण में सहयोग करें।


2. डॉ0 कौर द्वारा स्पष्ट किया गया कि सामाजिक आर्थिक रूप से वंचित वर्ग को 5 प्रकार वर्गीकृत किया गया है-
 1.लिंग पहचान 
2.सामाजिक सांस्कृतिक पहचान
 3.भौगोलिक पहचान 
4.विशेष आवश्यकता वाले बच्चे
 5.सामाजिक आर्थिक स्थिति


3. सभी के लिए समावेशी शिक्षा पर बात करते हुए उन्होने बताया कि 2030 तक यह लक्ष्य रखा गया है कि चार करोड़ नये विद्यार्थी शैक्षणिक संस्थानों में नामांकित हों।
 SEDG का नामांकन 50% तक पहुँच सके जिसके अंतर्गत उच्च गुणवत्ता वाली ईसीसीई  की सार्वभौमिक पहुंच, बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान, ड्रॉपआउट कम और हर स्तर पर सार्वभौमिक  पहुंच की बात की गई।



देशभर में  सफल नीतियों और योजनाओं को मजबूत किया जाए इस पर उन्होंने अपने विचार रखते हुए बताया कि से सहपाठी शिक्षक, ओपन विद्यालय शिक्षा तथा उचित बुनियादी ढांचा उपयुक्त अपने विद्यालय में काउंसलर और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया जायेगा।
परिवहन के लिए साइकिल और साइकिल पैदल समूह का गठन इसके साथ ही लक्षित छात्रवृत्ति और नगद हस्तांतरण की व्यवस्था की बात शिक्षा नीति के तहत की गई है।

 SEDGs की बड़ी आबादी वाले क्षेत्रों को विशेष शिक्षा क्षेत्र घोषित किया जाएगा। जिसमें उनके बचपन से ही मूलभूत साक्षरता संख्या,पहुंच, नामांकन और उपस्थिति के बारे में महत्वपूर्ण सिफारिशें और ठोस तरीके से उन्हें लक्षित किया जाएगा।
 इनकी उपस्थिति और सीखने के परिणामों को बढ़ाने  के लिए काउंसलर की व्यवस्था होगी और इन क्षेत्रों में प्रतिभाशाली और मेधावी छात्र छात्राओं के लिए विशेष छात्रावास, ब्रिज पाठ्यक्रम, फीस माफ छात्रवृत्ति से वित्तीय सहायता की व्यवस्था की जाएगी ।
अतिरिक्त स्कूलों में ऐसे जिलों में जवाहर नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय खोले जाएंगे ।
इनकी सीखने के परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और पहुंच से संबंधित सामान समस्याओं के लिए वोकेशनल एजुकेशन की व्यवस्था रहेगी डॉ0 कौर ने इस तरफ भी प्रकाश डाला।


समतामूलक और समावेशी शिक्षा में लिंग को लेकर विशेष रूप से बात की गई है लड़कियों और ट्रांसजेंडर छात्रों की पहुंच विद्यालय तक हो।
 जेंडर गैप को कम किया जाए सभी को समान अवसर दिए जाएं लड़कियों को स्कूल में रखने पर खास ध्यान दिया जाए जिसके लिए उनकी सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए।
 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को मजबूत किया जाएगा और इन्हें बारहवीं तक बढ़ाया जाएगा जैसा कि सीमा जौनसारी मैम ने कहा कि उत्तराखंड में पहले यह 12वीं तक चल रही है।
 लिंग संवेदनशीलता पर बात की जाएगी और उसको पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाया जाएगा केंद्र में नीतियों और योजनाओं को विशेष रूप से केंद्रित करने पर रहेगा।


 डॉ0 निमिरत कौर ने समावेशी शिक्षा के लिए विशेष रुप से ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया कि  बच्चे नेशनल करिकुलम फ्रेम फ़ोर सैकेण्डरी एजुकेशन  से जुड़ाव महसूस करें।
  बोर्ड परीक्षा,NTA टेस्ट में बैठने और उच्च शिक्षा से जुड़ने के लिए सभी को प्रोत्साहित किया जाना बहुत आवश्यक है जिसकी NEP 2020 में बात की गई है।
 इसके अलावा वैकल्पिक विद्यालयों की व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे इन सब विविधताओं  के साथ ही सभी बच्चे मुख्यधारा से जुड़ पाए
 मुख्यधारा से जुड़ने के लिए उनके लिए वित्तीय व्यवस्था, शिक्षक और आधारभूत सुविधाओं की बात कही गई है और इसके अलावा किसी भी प्रकार की सुविधा के लिए स्कॉलरशिप और अन्य अवसरों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम तैयार किया जाएगा।

जैसा कि पहले भी बताया गया था कि सिर्फ बच्चों को विद्यालय तक लाना शिक्षा नीति के महत्वपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करता। उसके पश्चात स्कूली स्तर पर एक अनुकूल संस्कृति निर्माण बहुत आवश्यक है।

 स्कूल पाठ्यचर्या में मानवीय मूल्यों और विविधताओं का सम्मान किया जाना चाहिए और सभी के प्रति संवेदनशीलता का विकास किया जाना जरूरी है।

 मुख्य रूप से SEDGs  के लिए सामान्य बालक संवेदनशील हों।

 परस्पर सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार किया जाए इसके लिए प्रयास किए जाएंगे।

 शिक्षक शिक्षा में समावेशन और क्षमता मुख्य पहलू होगा पूर्वाग्रह को दूर कर किया जाना चाहिए और सभी धर्म और संस्कृतियों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए।


 इसके अलावा डॉ0 कौर द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 में समतामूलक तथा समावेशी शिक्षा से संबंधित सभी बिंदुओं पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई।

इसके पश्चात् समूह द्वारा कई प्रश्न साझा किये गए जिनका डॉ 0 नीमिरत कौर द्वारा सभी के संतोषजनक जवाब दिये गये।

1. मानसिक विकलांग बच्चों के खाते आसानी से नही खुल पाते है , जिससे छात्रवृत्ति प्राप्त करने मे समस्या होती है ।कृपया समाधान बताएं। ।।
2. कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को फेल करने की व्यवस्था क्या है इस नई शिक्षा नीति में, कृपया स्पष्ट करने की कृपा करें।
3. सरकारी स्कूलों की सबसे बड़ी समस्या है कि बच्चे स्कूल नहीं आते है उनको स्कूल लाने के लिए Education Policy 2020 में क्या व्यवस्था है?
4. Early Childhood care and educationका कैरिकुलम किस प्रकार का होगा और इसका आधार क्या होगा??
5. मानसिक विकलांग बच्चों के खाते आसानी से नही खुल पाते है , जिससे छात्रवृत्ति प्राप्त करने मे समस्या होती है ।कृपया समाधान बताएं। ।।
6. disabled छात्रों का मूल्यांकन किस प्रकार से हो?
7. क्या पूरे देश में एक राष्ट्र एक शिक्षा नीति हो पाएगी?
8. शिक्षण प्रक्रिया में समावेशन की अधिक से अधिक स्थान देने के लिए रिसोर्स शिक्षक, काउंसलर,मनोवैज्ञानिक और अन्य विशेषज्ञों का अपना महत्व है।पिछले अनुभव बताते हैं कि बच्चों को इनका अधिक लाभ नहीं मिल पाया शायद इसका कारण आर्थिक तंगी भी हो सकती है। कुछ वैकल्पिक सुझाव जो कि अधिक से अधिक बच्चो को  लाभान्वित कर सकते है देने का कष्ट करें।



पूरे कार्यक्रम के दौरान ए0पी0एफ0 से श्री  दीपक रावत जी का महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग रहा।


इस तरह से डायट रतूडा में आयोजित इस वेबिनार से सभी लाभान्वित हुए और समतामूलक और समावेशी शिक्षा को समझने में मदद मिली।इसके लिए हम सभी गणमान्य अतिथिगणों,वक्ताओं एवं सम्मानित शिक्षक समाज का धन्यवाद ज्ञापित करते हैं।
            समन्वयक वेबिनार डायट रतूड़ा रुद्रप्रयाग 

                                धन्यवाद!












Thursday, September 3, 2020

एक दिन पर्यावरण प्रेमी सतेंद्र भंडारी जी के साथ

2 सितम्बर 2020 

आज का दिन मेरे लिए बहुत खास था क्योंकि मुझे एक मौका मिला था पर्यावरण प्रेमी श्री  सतेंद्र भंडारी जी के साथ जिले के विद्यालयों में पौधे बाँटने जाने का जो कि जिलाधिकारी महोदया  और ADM जी के आदेश से प्राप्त हुए थे।

मैने लगभग 5:30 बजे सुबह फोन किया तो वे घर से निकल चुके थे।ये पूछने पर नाश्ता किया या नहीं तो बोले देर हो जायेगी मैं तो ऐसे ही चल पड़ा।

फ़िर मैने फटाफट चलने की तैयारी शुरु की और टिफिन पैक कर लिया। सात बजे करीब गाडी पर ADM महोदया ने स्वास्तिक बनाकर गाड़ी रवाना की जिसके फोटो हमने समूह में देखी।

उसके बाद मुझे भंडारी जी ने बताया कि वे पौधे देने क्वीलखाल की तरफ गये हैं।लगभग 9 बजे गाडियाँ बैनोली पहुँची कुल तीन जिनमें से 2 में पौधे भरे थे और एक में ट्री गॉर्ड थे।

एक गाडी में भंडारी जी मैं और प्रवीण जी चल पड़े। कितने उत्साह से भरा माहौल था प्रवीण जी बहुत अच्छे गायक  हैं तो रास्ता गीत संगीत के बीच कटने वाला था।

सबसे पहले मयाली में सकलानी जी ने पौधे लिए और हम गोर्ती की तरफ चल पड़े।वहां विपिन राणा जी पौधे लेने के आए।
 पौधे देने के बाद गाडी स्टार्ट की तो गाडी ने तो मना कर दिया जैसे पर जोश से भरे इस दल को कौन रोक सकता था। गाड़ी को धक्के देते हुई आगे ले जाया जा रहा था।भंडारी जी प्रवीण जी और दूसरी गाडी में बैठे दो साथी भी गाडी को धक्का देते हुए आगे तक ले गये।
थोड़ी दूर जाकर प्रवीण जी ने गाड़ी का बोनट खोलकर क्या किया पता नहीं पर गाडी  तैयार थी मिशन पर चलने के लिए।

गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखो
आँधियों तुमने दरख़्तों को गिराया होगा

- कैफ़ भोपाली

अब हम रामाश्रम पहुँचे वहाँ पौधे दिये। मैने भंडारी जी को टिफिन लेने को बोला पर वे जिस मिशन को पूरा करने पर चले थे खाने की तो शायद उनको जैसे याद ही न थी बोले आगे चलते हैं फ़िर देख लेंगे।

उसके बाद सिलगढ़ को पार करते हुए हम प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर पहाड़ियों के बीच बाँगर पट्टी की तरफ चल पड़े।पौंठी पहुँचे वहां पर पौधे और ट्री गार्ड उतारे गए ।हम आगे बढ़े तो पता लगा रोड खराब है ट्रक आगे नहीं जा सकता फ़िर ट्री गॉर्ड उतारकर गाड़ियों में रखे गये हमें अभी दो और विद्यालयों में पहुँचना था।
दोनों गाड़ियाँ आगे बढ़ चली प्रकृति के सौन्दर्य को निहारते हुए हम कैलाश बाँगर पहुँचे। सुन्दर सा विद्यालय और सामने सचिन की कैन्टीन जहाँ खाने के साथ- साथ रिंगाल से सुन्दर कंडे भी बन रही थी।

सुबह से बिना कुछ खाये पिए चले भंडारी जी का अब थोड़ा सा समय मिला तो दिन के 1 बज चुके थे।अब दो चार रोटियों का नाश्ता और दिन का भोजन एक साथ हुआ।वो भी 10-15 मिनट में ही निपट गया देर जो हो रही थी।

किसी के भी चेहरे पर थकान का नाम न था।हँसते-हँसते फ़िर आगे रणधार की तरफ चल पड़े।वहाँ पौधे देने के बाद अब गुप्तकाशी वाले रास्ते पर चलना था जहाँ भदौरिया जी पौधे लेने सड़क तक पहुँचे और बाकी साथी प्रवीण जी वहाँ पर मैगी देख भूख से वही खाने लगे खाने की व्यवस्था क्या होती सबने ऐसे ही आनन्द ले लिया।रा0इ0का0 पाँजणा में एक पौधा स्वयं भंडारी जी द्वारा लगाया गया। हर विद्यालय पौधा देते हुए वे ये बताना कभी नहीं भूलते कि ये नवजात शिशु की तरह हैं इनका पूरा ध्यान रखना।

 लगभग 4 बज चुके थे और अभी लिस्ट बहुत लम्बी थी।तेजी से दौड़ती तीनों गाड़ियाँ तैला की तरफ चल पड़ी वहीं पर 7 पौधे और 2 ट्री गॉर्ड उतारे।शाम होने लगी थी और बादल भी घुमड़ घुमड़ करने लगे थे अभी सिद्धसौड़ पौधे पहुंचाने थे जहाँ शिशुपाल रावत जी इन्तजार कर रहे थे वहां भंडारी जी द्वारा पौधे पहुँचाए गये।
अब निकल पड़े अगस्त्यमुनि की तरफ और इतनी बार गाड़ी से चढ़ना उतरना पर पर्यावरण के प्रति ऐसा प्रेम भंडारी जी के मुख पर था कि जैसे थकान तो कुछ होती ही न हो।हम बातों-बातों में अगस्त्यमुनि पहुँच चुके थे।प्रवीण जी के गीत और भंडारी जी के अनुभव,किस्सों से रास्ता बहुत रोचक अनुभवों के साथ, रास्ते में एक-एक पल को हम जी रहे थे।अगस्त्यमुनि से कुछ पहले विचार किया गया लिस्ट बहुत लम्बी थी जहाँ  पौधों को पहुँचाना था पर अब रात होने में एक घण्टे से ज्यादा का समय शेष नहीं था।

अब अगले दिन पर सहमति बनी।अगस्त्यमुनि में रोड का काम चल रहा था तो कुछ देर ऐसे ही जाम में रुके रहे पर कोई भी परेशान नहीं था बस पूरे दिन के अनुभवों पर बातचीत हो रही थी।
इस तरह से रात होने तक मैं अपने घर पहुँच चुकी थी पर भंडारी जी को अभी लम्बा सफ़र तय करना था ।लगभग 10 बजे तक ही भंडारी जी अपने घर पहुँच पाए।
उनका समर्पण और पर्यावरण प्रेम हमेशा से ही मुझे प्रेरित करता रहा था।उनके विद्यालय कोट तल्ला में किया हुआ काम आदर्श के रूप में हमारे सामने कुछ करने की सदैव प्रेरणा देता है जो हमारे जनपद के लिए गौरव की बात है।
मैं सौभाग्यशाली हूँ जो मुझे भंडारी जी जैसे प्रेरक व्यक्तित्व के सानिध्य में एक दिन सीखने का मौका मिला।उनका सरल स्वभाव और काम की लगन अद्भुत ही है जो हमेशा प्रेरणा देता रहता है।

कुछ वर्षों बाद ये पौधे विद्यालयों में बच्चों को फल-फूलों के साथ जीवन की प्रेरणा दे रहे होंगे।

किसी दरख़्त से सीखो सलीक़ा जीने का
जो धूप छांव से रिश्ता बनाए रहता है

- अतुल अजनबी



                                  अमृता नौटियाल 
                                  स0 अ0 विज्ञान 
                                रा0 इ0 का0 तैला सिलगढ़ 
                               जखोली रुद्रप्रयाग 
                            

Wednesday, August 12, 2020

ICT ONLINE WORKSHOP तीन दिवसीय कार्यशाला (11 अगस्त से 13 अगस्त तक)


समाज और शिक्षा दोनों ही परस्पर प्रभावित होते हैं।आज के इस दौर में जब समाज कोरोना महामारी से प्रभावित है।वहीं शिक्षा के नये विकल्पों को लेकर पूरा समाज चिंतित है। शिक्षकों की इस खोज में एक दिशा देने का सराहनीय प्रयास किया है संयुक्त रूप से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रुद्रप्रयाग,मिशन शिक्षण संवाद की टीम और अजीम प्रेमजी फाऊंडेशन रुद्रप्रयाग ने।
      ऑनलाइन शिक्षा जहाँ विकल्प के रूप में सामने आई है वहीं शिक्षकों के लिए एक उम्मीद और चुनौती दोनों ही है।तीन दिवसीय कार्यशाला जो आयोजित की गयी इन सभी में शिक्षकों को पारंगत बनाने की सफ़ल कोशिश नज़र आ रही हैं।

*"ICT Online Workshop Three Day's Webinar Report At 11-08-2020*

 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रतूड़ा(रूद्रप्रयाग),अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन रूद्रप्रयाग तथा मिशन शिक्षण संवाद के संयुक्त प्रयासों से आयोजित आईसीटी ऑनलाइन कार्यशाला (वेबीनार )के प्रथम दिवस पर डायट रतूड़ा के प्राचार्य  प्रतिनिधि के रूप में डायट रतूड़ा के प्रवक्ता डॉ.विनोद यादव जी द्वारा कार्यशाला का शुभारंभ किया  गया. कार्यशाला में सर्वप्रथम संचालक श्री हेमंत चौकियाल जी द्वारा मुख्य सन्दर्भ दाता क्रमश: श्रीमती श्वेता डाबर मैम, श्री अफसर अली सर, श्रीमती लक्ष्मी काला मैम, श्रीमती किरण भाकुनी मैम का परिचय कराते हुए हार्दिक स्वागत और अभिनंदन किया गया| मिशन शिक्षण संवाद की टीम के प्रबल स्तंभ श्री संतोष जोशी जी,श्री  माधव सिंह नेगी जी,श्री कमल बिष्ट जी श्रीमती कुसुम भट्ट जी,श्री गोपाल सिंह नेगी जी का परिचय करवाते हुए उनका हार्दिक अभिनंदन किया गया | साथ ही अजीम प्रेमजी फाउंडेशन रूद्रप्रयाग के आदरणीय शफीक सर और सुकान्त शरण सर का परिचय देते हुए संचालक महोदय द्वारा अवगत कराया गया कि अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के साथियों द्वारा ही हमें यह वेबीनॉर का प्लेटफार्म माइक्रोसॉफ़्ट टीम ऐप के रूप में उपलब्ध कराया गया है | उन का हार्दिक  स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया गया |
अपने संबोधन में डॉ0 यादव सर द्वारा  सभी उपस्थित सदस्यों के स्वागत /अभिनंदन के साथ कार्यशाला के उद्देश्यों के साथ  कार्यशाला के प्रोटोकॉल को सभी के सामने रखा गया|
*प्रथम दिवस के प्रथम सत्र का प्रारंभ करते हुए श्रीमती किरण भाकुनी मैम द्वारा pixellabके अंतर्गत - सारे tools के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। new text में text के लिए typing, copy paste और गूगल से सेलेक्ट कर सकते हैं। उनके के द्वारा पैरा को copy paste करके और टाइपिंग करके बताया गया और color transparent,brightness....... भी बताया गया किस प्रकार हम विषय वस्तु को रुचिकर आकर्षक एवं कलरफुल बनाकर विद्यालय के  पठन- पाठन वातावरण को सुंदर और आकर्षक बना सकते हैं।स्मार्ट लुक के लिए 3D टैक्स के बारे में एवं उनके सारे टूल्स के बारे में भी बताया गया।*
A पर text करके अपनी कहानी,कविता या अपने विचारों को टाइपिंग, कॉपी पेस्ट करके व्यक्त कर सकते हैं एवं सुंदर कलर्सफुल इमोजी एवं स्टीकर्स द्वारा सुंदर व आकर्षक एवं रुचि पूर्ण बना सकते हैं तथा विद्यालय में अपने छात्र-छात्राओं को  कोरोना कॉल में w/a के माध्यम से प्रस्तुत कर सकते हैं |

श्रीमती भाकुनी मैम द्वारा text को विभिन्न कलर कैसे दें के बारे में बताया गया। उनके द्वारा हिंदी एवं इंग्लिश फॉन्ट में कॉपी पेस्ट एवं टाइपिंग करके उसमें कलर्स एवं इमोजी, स्टिकर का प्रयोग किस प्रकार करें?यह भी बताया गया कलर कम ज्यादा,इमेज इन फ्रंट एंड बैक फ्रंट के बारे में, edit,remove, copy paste,disable.imag size, आदि टूल्स का उपयोग करना बताया /सिखाया गया|
मैम द्वारा बताया गया कि यह सब कार्य जब कलर फुल हो जाता है तो इससे बच्चों में पढ़ने /जानने /सीखने की रुचि जागृत हो जाती है. मैम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपके द्वारा pixcellab के सारे tools के
बारे में विस्तृत जानकारी दी गई हालांकि पहली बार सारे फंक्शन के बारे में जानना थोड़ा कठिन तो अवश्य लग रहा है लेकिन प्रयास करने से सब मुमकिन है। *तत्पश्चात आदरणीय अफसर अली  सर जी द्वारा MS word के सारे टूल्स के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। जैसे login,blank documents में new documents तैयार करना, working area. Share, save, save as, print, back space, enter new documents open gIT,undo a one tap में टाइपिंग के लिए तैयार, double tap में word select and triple tap में paragraph select किया जाता है। उनके द्वारा A text, colors, paragraph change, back space,comment, footer,header,blank table के बारे में page number, equation तथा बुलेट के बारे में foot note,draw.margine, word count के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।* सर आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद आपके द्वारा MS word के बारे में हमें इतनी विस्तृत जानकारियां दी गई |
बीच-बीच में होने वाली वार्ता से लग रहा था कि कहीं कहीं आज नेटवर्क बहुत कमजोर है, लेकिन मैं इस रूप में अपने आपको भाग्यशाली मान रही हूँ कि मेरे क्षेत्र में आज नेटवर्क प्रबलता बहुत अच्छी रही जिससे मुझे देखने /सुनने /समझने में कोई जाता दिक्कत महसूस नहीं हुई| 
 
निजी तौर पर मेरा मानना है कि  इस प्रकार की नवीन तकनीकियों का ज्ञान पाकर हम अपने अध्यापन कार्य को नई तकनीकि से आसान रुचिपूर्ण और असरदार बना सकेंगे | जिससे हमारे विद्यालयों में छात्रों के नामांकन में वृद्धि  भी संभव होगी एवं विद्यालय का वातावरण सुंदर, आकर्षक एवं रुचिपूर्ण बनेगा। हालांकि ग्रामीण स्तर पर नई तकनीकी का प्रयोग करना कठिन
अवश्य है लेकिन नामुमकिन नहीं.  अभ्यास एवं निरंतर प्रयास से संभव हो सकता है|

अंत में कार्यक्रम संचालक श्री हेमंत चौकियाल जी, डॉ0 विनोद यादव जी डाइट रतूडा ,सहित मिशन शिक्षण संवाद टीम के सभी सम्मानित साथियों, सभी सम्मानित सन्दर्भदाताओं,एवं सभी शिक्षक भाई बहनों का हार्दिक आभार व धन्यवाद ज्ञापित करती हूँ |

                        प्रस्तुतकर्ता 
                  श्रीमती मंजू भारती
                            प्र0अ0
                   रा० प्रा० वि० ल्वारा
                              ऊखीमठ
                              रूद्रप्रयाग



दिनांक 13 अगस्त 2020 कार्यशाला का द्वितीय दिन कुछ इस प्रकार से रहा-

लगभग 2:30 pm पर कार्यशाला प्रारम्भ हुई।उससे पहले श्री हेमंत चौकियाल जी और डायट प्रवक्ता श्री विनोद कुमार यादव जी सभी के स्वागत के लिए तैयार थे।

 पहले सत्र में श्वेता डावर मैम द्वारा pixel lab पर tools की जानकारी दी गयी।मैम ने बहुत रोचक शुरुआत की जिससे सीखने का एक बहुत अच्छा वातावरण तैयार हुआ।

Pixel lab के सभी tools जैसे text,hexagonal सभी पर काम जैसे ही शुरु हुआ तो कुछ कमाल ही सामने आया जो इस तरह से था जो बच्चों के लिए पढ़ने में आकर्षक और शिक्षकों को बनाने में रुचिकर था।ये कुछ ऐसा था-


उसके बाद हमारे अगले सन्दर्भदाता अफसर अली जी आए।बच्चों का मूल्याकंन जो हमेशा से ही एक चुनौती रहा है उसका एक उपाय worksheet लेकर जिसको बहुत सरल भाषा में कुछ ऐसा समझाया कि सभी साथियों ने तुरंत ही 
अपने-अपने विद्यालय के बच्चों के लिए workशीट तैयार कर डाली।जो कुछ ऐसी थी-

मिशन शिक्षण संवाद शिक्षा के क्षेत्र में अपना बेहतरीन काम कर रहा है जिसमें इससे जुड़े शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान है।गढ़वाल से मंडल संयोजक श्री माधव नेगी जी द्वारा सभी को मिशन शिक्षण संवाद से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।

उसके पश्चयात एक बार फ़िर श्वेता मैम नये जोश को लाते हुए आईं । जो भी बताया था उसका पुनः अभ्यास हुआ और फ़िर एक नई शीट बच्चों के लिए तैयार की गई ।जो इस प्रकार से थी।जिसमें कुछ नये टूल्स की जानकारी मिली।ये कुछ ऐसा था

इस नई कला को सीखने में समय कुछ इतनी तेजी से निकला कि कब 4:30 pm हो गया पता ही नहीं चला।

इस ict workshop में प्रतिभाग करने वाली पूरी टीम आप दोनो सन्दर्भदाताओं को बहुत-बहुत धन्यवाद देती है।साथ ही जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रुद्रप्रयाग,मिशन शिक्षण संवाद और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन रुद्रप्रयाग का हार्दिक आभार।


कार्यशाला का तृतीय दिवस 13 अगस्त 2020

श्री हेमंत कुमार चौकियाल जी द्वारा सभी का स्वागत कर सत्र का प्रारंभ किया गया। लक्ष्मी काला मैम द्वारा pixel lab पर बच्चों के लिए आकर्षक id कार्ड तैयार करना सिखाया गया जो कि आज को जरुरत भी हैं। जो ऐसे बने थे-

उसके बाद अफसर अली सर ने बेहद उपयोगी जानकारी साझा की जिसमें एप्लिकेशन का फ़ॉर्मेट तैयार करना सिखाया।किस प्रकार से कॉलम बनाये जायें ।कैसे हस्ताक्षर पेपर पर आएँ यह सब बताया गया।

एक बार फ़िर लक्ष्मी मैम का सत्र हुआ जिसमें मैम ने  फ्लेक्सी कैसे तैयार की जाएँ यह बताया ।जो कि आज समाज में अपनी बात पहुंचाने का बहुत उपयोगी माध्यम है।विद्यलयों में बहुत ही उपयोगी भी।ये कुछ इस प्रकार से बने थे-

तीनों सत्र बहुत उपयोगी जानकारी देने वाले थे। उसके बाद किरन भाकुनी मैम के द्वारा तीनों दिन का कार्य pic के माध्यम से साझा किया गया। उसके बाद विकासखण्ड ऊखीमठ के उपशिक्षा अधिकारी सम्मानीय श्री रवि कुमार जी का संदेश सभी को नया जोश देने वाला था जिसका वाचन चौकियाल जी द्वारा किया गया।
जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान रुद्रप्रयाग के प्राचार्य जी का संदेश आशीर्वाद के रूप में सभी को मिला ।शिक्षा के लिए उनका समर्पण और शिक्षकों के लिए नया उत्साह जिसमें था।
उसके बाद श्रीमती कुसुम भट्ट जी ने सभी को अपने विचारों से लाभान्वित किया और नवीन ऊर्जा सभी में भरने का काम किया।
श्री सन्तोष जोशी जी ने सभी को सम्बोधित किया।मिशन शिक्षण संवाद के मिशन और उनके सहयोग भावना से सभी परिचित हुए।
अन्त में श्री यादव जी ने कार्यक्रम का समापन करते हुए सभी को कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाई दी और श्री हेमंत कुमार चौकियाल जी द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।

ये कार्यक्रम निश्चित रूप से बहुत ही सफ़ल रहा।जिस प्रकार से online शिक्षा एक विकल्प और पूरक दोनो रूपो में हमारे सामने है उसका हम सभी अधिक से अधिक लाभ ले पाएँ इस उद्देश्य में यह कार्यशाला सफ़ल रही।एक बार फ़िर से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रुद्रप्रयाग,मिशन शिक्षण संवाद उत्तराखंड,अजीम प्रेमजी फाऊंडेशन रुद्रप्रयाग,श्री दीपक जोशी जी,श्री माधव सिंह नेगी जी और सभी सन्दर्भदाता अफसर अली सर जी,किरन भाकुनी मैम,श्वेता डावर मैम,लक्ष्मी काला मैम,कार्यक्रम के संचालक  हेमंत चौकियाल जी सभी सम्मानित साथियों का हार्दिक आभार।