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Wednesday, August 12, 2020

ICT ONLINE WORKSHOP तीन दिवसीय कार्यशाला (11 अगस्त से 13 अगस्त तक)


समाज और शिक्षा दोनों ही परस्पर प्रभावित होते हैं।आज के इस दौर में जब समाज कोरोना महामारी से प्रभावित है।वहीं शिक्षा के नये विकल्पों को लेकर पूरा समाज चिंतित है। शिक्षकों की इस खोज में एक दिशा देने का सराहनीय प्रयास किया है संयुक्त रूप से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रुद्रप्रयाग,मिशन शिक्षण संवाद की टीम और अजीम प्रेमजी फाऊंडेशन रुद्रप्रयाग ने।
      ऑनलाइन शिक्षा जहाँ विकल्प के रूप में सामने आई है वहीं शिक्षकों के लिए एक उम्मीद और चुनौती दोनों ही है।तीन दिवसीय कार्यशाला जो आयोजित की गयी इन सभी में शिक्षकों को पारंगत बनाने की सफ़ल कोशिश नज़र आ रही हैं।

*"ICT Online Workshop Three Day's Webinar Report At 11-08-2020*

 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रतूड़ा(रूद्रप्रयाग),अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन रूद्रप्रयाग तथा मिशन शिक्षण संवाद के संयुक्त प्रयासों से आयोजित आईसीटी ऑनलाइन कार्यशाला (वेबीनार )के प्रथम दिवस पर डायट रतूड़ा के प्राचार्य  प्रतिनिधि के रूप में डायट रतूड़ा के प्रवक्ता डॉ.विनोद यादव जी द्वारा कार्यशाला का शुभारंभ किया  गया. कार्यशाला में सर्वप्रथम संचालक श्री हेमंत चौकियाल जी द्वारा मुख्य सन्दर्भ दाता क्रमश: श्रीमती श्वेता डाबर मैम, श्री अफसर अली सर, श्रीमती लक्ष्मी काला मैम, श्रीमती किरण भाकुनी मैम का परिचय कराते हुए हार्दिक स्वागत और अभिनंदन किया गया| मिशन शिक्षण संवाद की टीम के प्रबल स्तंभ श्री संतोष जोशी जी,श्री  माधव सिंह नेगी जी,श्री कमल बिष्ट जी श्रीमती कुसुम भट्ट जी,श्री गोपाल सिंह नेगी जी का परिचय करवाते हुए उनका हार्दिक अभिनंदन किया गया | साथ ही अजीम प्रेमजी फाउंडेशन रूद्रप्रयाग के आदरणीय शफीक सर और सुकान्त शरण सर का परिचय देते हुए संचालक महोदय द्वारा अवगत कराया गया कि अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के साथियों द्वारा ही हमें यह वेबीनॉर का प्लेटफार्म माइक्रोसॉफ़्ट टीम ऐप के रूप में उपलब्ध कराया गया है | उन का हार्दिक  स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया गया |
अपने संबोधन में डॉ0 यादव सर द्वारा  सभी उपस्थित सदस्यों के स्वागत /अभिनंदन के साथ कार्यशाला के उद्देश्यों के साथ  कार्यशाला के प्रोटोकॉल को सभी के सामने रखा गया|
*प्रथम दिवस के प्रथम सत्र का प्रारंभ करते हुए श्रीमती किरण भाकुनी मैम द्वारा pixellabके अंतर्गत - सारे tools के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। new text में text के लिए typing, copy paste और गूगल से सेलेक्ट कर सकते हैं। उनके के द्वारा पैरा को copy paste करके और टाइपिंग करके बताया गया और color transparent,brightness....... भी बताया गया किस प्रकार हम विषय वस्तु को रुचिकर आकर्षक एवं कलरफुल बनाकर विद्यालय के  पठन- पाठन वातावरण को सुंदर और आकर्षक बना सकते हैं।स्मार्ट लुक के लिए 3D टैक्स के बारे में एवं उनके सारे टूल्स के बारे में भी बताया गया।*
A पर text करके अपनी कहानी,कविता या अपने विचारों को टाइपिंग, कॉपी पेस्ट करके व्यक्त कर सकते हैं एवं सुंदर कलर्सफुल इमोजी एवं स्टीकर्स द्वारा सुंदर व आकर्षक एवं रुचि पूर्ण बना सकते हैं तथा विद्यालय में अपने छात्र-छात्राओं को  कोरोना कॉल में w/a के माध्यम से प्रस्तुत कर सकते हैं |

श्रीमती भाकुनी मैम द्वारा text को विभिन्न कलर कैसे दें के बारे में बताया गया। उनके द्वारा हिंदी एवं इंग्लिश फॉन्ट में कॉपी पेस्ट एवं टाइपिंग करके उसमें कलर्स एवं इमोजी, स्टिकर का प्रयोग किस प्रकार करें?यह भी बताया गया कलर कम ज्यादा,इमेज इन फ्रंट एंड बैक फ्रंट के बारे में, edit,remove, copy paste,disable.imag size, आदि टूल्स का उपयोग करना बताया /सिखाया गया|
मैम द्वारा बताया गया कि यह सब कार्य जब कलर फुल हो जाता है तो इससे बच्चों में पढ़ने /जानने /सीखने की रुचि जागृत हो जाती है. मैम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपके द्वारा pixcellab के सारे tools के
बारे में विस्तृत जानकारी दी गई हालांकि पहली बार सारे फंक्शन के बारे में जानना थोड़ा कठिन तो अवश्य लग रहा है लेकिन प्रयास करने से सब मुमकिन है। *तत्पश्चात आदरणीय अफसर अली  सर जी द्वारा MS word के सारे टूल्स के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। जैसे login,blank documents में new documents तैयार करना, working area. Share, save, save as, print, back space, enter new documents open gIT,undo a one tap में टाइपिंग के लिए तैयार, double tap में word select and triple tap में paragraph select किया जाता है। उनके द्वारा A text, colors, paragraph change, back space,comment, footer,header,blank table के बारे में page number, equation तथा बुलेट के बारे में foot note,draw.margine, word count के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।* सर आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद आपके द्वारा MS word के बारे में हमें इतनी विस्तृत जानकारियां दी गई |
बीच-बीच में होने वाली वार्ता से लग रहा था कि कहीं कहीं आज नेटवर्क बहुत कमजोर है, लेकिन मैं इस रूप में अपने आपको भाग्यशाली मान रही हूँ कि मेरे क्षेत्र में आज नेटवर्क प्रबलता बहुत अच्छी रही जिससे मुझे देखने /सुनने /समझने में कोई जाता दिक्कत महसूस नहीं हुई| 
 
निजी तौर पर मेरा मानना है कि  इस प्रकार की नवीन तकनीकियों का ज्ञान पाकर हम अपने अध्यापन कार्य को नई तकनीकि से आसान रुचिपूर्ण और असरदार बना सकेंगे | जिससे हमारे विद्यालयों में छात्रों के नामांकन में वृद्धि  भी संभव होगी एवं विद्यालय का वातावरण सुंदर, आकर्षक एवं रुचिपूर्ण बनेगा। हालांकि ग्रामीण स्तर पर नई तकनीकी का प्रयोग करना कठिन
अवश्य है लेकिन नामुमकिन नहीं.  अभ्यास एवं निरंतर प्रयास से संभव हो सकता है|

अंत में कार्यक्रम संचालक श्री हेमंत चौकियाल जी, डॉ0 विनोद यादव जी डाइट रतूडा ,सहित मिशन शिक्षण संवाद टीम के सभी सम्मानित साथियों, सभी सम्मानित सन्दर्भदाताओं,एवं सभी शिक्षक भाई बहनों का हार्दिक आभार व धन्यवाद ज्ञापित करती हूँ |

                        प्रस्तुतकर्ता 
                  श्रीमती मंजू भारती
                            प्र0अ0
                   रा० प्रा० वि० ल्वारा
                              ऊखीमठ
                              रूद्रप्रयाग



दिनांक 13 अगस्त 2020 कार्यशाला का द्वितीय दिन कुछ इस प्रकार से रहा-

लगभग 2:30 pm पर कार्यशाला प्रारम्भ हुई।उससे पहले श्री हेमंत चौकियाल जी और डायट प्रवक्ता श्री विनोद कुमार यादव जी सभी के स्वागत के लिए तैयार थे।

 पहले सत्र में श्वेता डावर मैम द्वारा pixel lab पर tools की जानकारी दी गयी।मैम ने बहुत रोचक शुरुआत की जिससे सीखने का एक बहुत अच्छा वातावरण तैयार हुआ।

Pixel lab के सभी tools जैसे text,hexagonal सभी पर काम जैसे ही शुरु हुआ तो कुछ कमाल ही सामने आया जो इस तरह से था जो बच्चों के लिए पढ़ने में आकर्षक और शिक्षकों को बनाने में रुचिकर था।ये कुछ ऐसा था-


उसके बाद हमारे अगले सन्दर्भदाता अफसर अली जी आए।बच्चों का मूल्याकंन जो हमेशा से ही एक चुनौती रहा है उसका एक उपाय worksheet लेकर जिसको बहुत सरल भाषा में कुछ ऐसा समझाया कि सभी साथियों ने तुरंत ही 
अपने-अपने विद्यालय के बच्चों के लिए workशीट तैयार कर डाली।जो कुछ ऐसी थी-

मिशन शिक्षण संवाद शिक्षा के क्षेत्र में अपना बेहतरीन काम कर रहा है जिसमें इससे जुड़े शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान है।गढ़वाल से मंडल संयोजक श्री माधव नेगी जी द्वारा सभी को मिशन शिक्षण संवाद से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।

उसके पश्चयात एक बार फ़िर श्वेता मैम नये जोश को लाते हुए आईं । जो भी बताया था उसका पुनः अभ्यास हुआ और फ़िर एक नई शीट बच्चों के लिए तैयार की गई ।जो इस प्रकार से थी।जिसमें कुछ नये टूल्स की जानकारी मिली।ये कुछ ऐसा था

इस नई कला को सीखने में समय कुछ इतनी तेजी से निकला कि कब 4:30 pm हो गया पता ही नहीं चला।

इस ict workshop में प्रतिभाग करने वाली पूरी टीम आप दोनो सन्दर्भदाताओं को बहुत-बहुत धन्यवाद देती है।साथ ही जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रुद्रप्रयाग,मिशन शिक्षण संवाद और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन रुद्रप्रयाग का हार्दिक आभार।


कार्यशाला का तृतीय दिवस 13 अगस्त 2020

श्री हेमंत कुमार चौकियाल जी द्वारा सभी का स्वागत कर सत्र का प्रारंभ किया गया। लक्ष्मी काला मैम द्वारा pixel lab पर बच्चों के लिए आकर्षक id कार्ड तैयार करना सिखाया गया जो कि आज को जरुरत भी हैं। जो ऐसे बने थे-

उसके बाद अफसर अली सर ने बेहद उपयोगी जानकारी साझा की जिसमें एप्लिकेशन का फ़ॉर्मेट तैयार करना सिखाया।किस प्रकार से कॉलम बनाये जायें ।कैसे हस्ताक्षर पेपर पर आएँ यह सब बताया गया।

एक बार फ़िर लक्ष्मी मैम का सत्र हुआ जिसमें मैम ने  फ्लेक्सी कैसे तैयार की जाएँ यह बताया ।जो कि आज समाज में अपनी बात पहुंचाने का बहुत उपयोगी माध्यम है।विद्यलयों में बहुत ही उपयोगी भी।ये कुछ इस प्रकार से बने थे-

तीनों सत्र बहुत उपयोगी जानकारी देने वाले थे। उसके बाद किरन भाकुनी मैम के द्वारा तीनों दिन का कार्य pic के माध्यम से साझा किया गया। उसके बाद विकासखण्ड ऊखीमठ के उपशिक्षा अधिकारी सम्मानीय श्री रवि कुमार जी का संदेश सभी को नया जोश देने वाला था जिसका वाचन चौकियाल जी द्वारा किया गया।
जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान रुद्रप्रयाग के प्राचार्य जी का संदेश आशीर्वाद के रूप में सभी को मिला ।शिक्षा के लिए उनका समर्पण और शिक्षकों के लिए नया उत्साह जिसमें था।
उसके बाद श्रीमती कुसुम भट्ट जी ने सभी को अपने विचारों से लाभान्वित किया और नवीन ऊर्जा सभी में भरने का काम किया।
श्री सन्तोष जोशी जी ने सभी को सम्बोधित किया।मिशन शिक्षण संवाद के मिशन और उनके सहयोग भावना से सभी परिचित हुए।
अन्त में श्री यादव जी ने कार्यक्रम का समापन करते हुए सभी को कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाई दी और श्री हेमंत कुमार चौकियाल जी द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।

ये कार्यक्रम निश्चित रूप से बहुत ही सफ़ल रहा।जिस प्रकार से online शिक्षा एक विकल्प और पूरक दोनो रूपो में हमारे सामने है उसका हम सभी अधिक से अधिक लाभ ले पाएँ इस उद्देश्य में यह कार्यशाला सफ़ल रही।एक बार फ़िर से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रुद्रप्रयाग,मिशन शिक्षण संवाद उत्तराखंड,अजीम प्रेमजी फाऊंडेशन रुद्रप्रयाग,श्री दीपक जोशी जी,श्री माधव सिंह नेगी जी और सभी सन्दर्भदाता अफसर अली सर जी,किरन भाकुनी मैम,श्वेता डावर मैम,लक्ष्मी काला मैम,कार्यक्रम के संचालक  हेमंत चौकियाल जी सभी सम्मानित साथियों का हार्दिक आभार।

Monday, July 27, 2020

गोल्डन कार्ड:राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना

 आयुष्मान भारत/अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के अंतर्गत उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा कर्मियों एवं पेंशनर्स से राज्य स्टेट गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम के तहत चिकित्सकीय उपचार के लिए गोल्डन कार्ड बनवाए जा रहे हैं।

 जिसके कुछ महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार से हैं-

1. कार्मिकों/ पेंशनर हेतु 'राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना'स्टेट गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम के नाम से चलाई जा रही है ।

2.इसमें पात्रता-उत्तराखंड राज्य के समस्त राजकीय सेवक पेंशनर एवं उनके परिवार के सदस्य।

3. उपचार का समस्त खर्चा सरकार द्वारा किया जाएगा अंशदान इस प्रकार से होगा-
 लेवल 1-5.                     ₹250 प्रतिमाह
 लेवल 6                          ₹450 प्रतिमाह 
लेवल 7 -11                    ₹650 प्रतिमाह
12 एवं उच्चतर                 ₹1000 प्रतिमाह

4. पति-पत्नी दोनों सेवारत होने की दशा में उच्चतर वेतनमान में जो कार्यरत हो उसके द्वारा अनुदान दिया जाएगा ।

5.राज्य स्वास्थ्य अभिकरण के खाते में प्रति माह जमा होगा जो ट्रेजरी आहरण वितरण अधिकारी के माध्यम से की जाएगी।

6. तुरंत कैशलेस उपचार उपलब्ध होगा एक लाख से अधिक पैकेज उपचार की दरों का निर्धारण राज्य सरकार प्राधिकरण के द्वारा किया जाएगा।

7.इसके अलावा अन्य राज्यों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण द्वारा जोड़ने की कार्यवाही और अन्य अनुमन्य दरों  के आधार पर क्लेम का भुगतान होगा।
8.यह सुविधा राज्य के सरकारी चिकित्सालयों (जिसमें समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला चिकित्सालय, संयुक्त चिकित्सालय एवं बेस चिकित्सालय सम्मिलित है) एवं सूचीब़द्ध निजी चिकित्सालयों में (रैफर करने के आधार पर) प्रदान की जायेगी। 

9.इमरजेन्सी में सूचीबद्ध निजी चिकित्सालयों में बिना रैफर किये भी उपचार कराया जा सकता है। यह योजना पूर्णतः कैशलैस एवं पेपरलैस है।


 10.योजना लागू  होने के पश्चात अंशदान में कटौती की जाएगी।


विस्तार से जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें-गोल्डन कार्ड

Wednesday, July 15, 2020

आनन्दम् पाठ्यचर्या:dream a dream foundation (एक मुलाकात)

आनन्दम पाठ्यचर्या की सहयोगी संस्था ड्रीम एंड ड्रीम द्वारा ऑनलाइन मीटिंग आयोजित की गई थी।इसकी जानकारी इमरान सर  जो dream and dream foundation से हैं, के द्वारा दी गई थी।  जिसमें सुचिता भट जो      dream a dream foundation  की सीईओ है, उनसे सर्वप्रथम परिचय हुआ जो लाइफ स्किल्स पर बहुत लंबे समय से काम कर रही है और विभिन्न  देशों में काम कर रही हैं।
एक अलग अंदाज में परिचय-
उसके बाद स्वाती मैम ने अपना परिचय दिया और जो था वह बहुत ही रोचकता से शुरू होता है ।अपने नाम के आगे विशेषण लगाना था  तो उन्होंने स्माइली  स्वाती अपना परिचय दिया ।कुछ ऐसे थे आनंद भरी आनन्दी,पागल-परेशान पवन  बहुत ही रोचक ...।

एक गतिविधि-

उसके बाद  एक कागज पर अपने जीवन के चार पहलू शारीरिक,मानसिक,सन्वेगात्मक और आध्यात्मिक के चार कॉलम बनाने को कहा गया।प्रत्येक कॉलम में इस समय जो फील हो रहा था वो लिखना था,जो कुछ ऐसा था।

प्रत्येक भाव को अब 1-10 के बीच no देना था।किस भाव की मात्रा कितनी है जिससे प्रत्येक लाईन पर एक-एक डॉट बन गया।वो डॉट कनेक्ट करने को कहा गया।मेरे भावों का डॉट कुछ ऐसा था।

इसके बाद इसको एक अलग पेज पर बनाने को कहा गया जिसमें सबके बहुत सुन्दर मनो भाव स्पष्ट निकलकर आ रहे थे।किसी की बटरफ्लाई बनी थी। किसी किसी ने पत्थर बनाया था और किसी का स्टारफिश था तो हर किसी ने अलग तरीके से उसको प्रतिबिंबित किया था। अपने भावों को प्रतिबिंबित किया था अब उस कैरेक्टर को उसका नाम पूछना था ।उसमें अपने   भाव ढूंढने थे और उससे बातचीत करनी थी। मेरा केरेक्टर कुछ ऐसा बना।

जो चित्र बना था उसमें सभी साथी अपने मनोभावों को कागज पर उतरा हुआ देख पा रहे थे।

चित्र को पत्र -

अब तीन प्रश्नो पर विचार करते हुए अपने चित्र के लिए पत्र लिखना था ।प्रश्न कुछ ऐसे थे-


1. ऐसा क्या है जो वाकई अभी सुनना चाहते हैं। 

2.ऐसा क्या करें जो हम अपने अंदर से अपने को मजबूत महसूस करें और उसको बढ़ा सकें। 

3.अभी हमारे जीवन में क्या मिसिंग है,क्या खोया हुआ है जो हमें वापस पाना है?

ये पत्र उस चित्र से अपने से बातचीत करनी थी, उससे बातचीत करते उसको एक पत्र लिखना है। एक तरह से यह अपने आप से बातचीत थे। जो हम अक्सर  समय नहीं निकाल पाते, हम दुनिया से बातचीत कर रहे होते हैं लेकिन स्वयं से हम बहुत कम ही बातचीत कर रहे थे और इस चित्र के माध्यम से यह बहुत अच्छे से उपाय और हम आसानी से अपने भावों को शब्दों में व्यक्त कर पाए। उसके बाद सभी साथियों ने अपने-अपने लेटर लिखे ।

फिर 3-3 के ग्रुप में सभी को ब्रेक आउट किया गया और वहां पर तीन- तीन लोग एक रूम में कनेक्ट हुए जिसमें 3 लोग आसानी से एक दूसरे से बातचीत कर पाए जो मेरा ग्रुप था। उसमें थे बागेश्वर डाइट से संदीप कुमार जोशी जी और दूसरी मैम देहरादून से थी ।संदीप संदीप कुमार ने बताया कि  मैं चाहता हूं कि तुरंत  पूरी दुनिया  कोरोना से मुक्त हो जाए। दूसरा जो उन्होंने सवाल का जवाब था कि क्षेत्र में कुछ काम करना चाहते हैं और अपने संपर्क में आने वाले बच्चों को और सहयोगियों के साथ सहयोगी की भूमिका निभाना चाहते हैं। तीसरा जो उनको लगता है कि उनको लाइफ में वह बातचीत के माध्यम से निकाल पाए। वह था एक काम को शुरू करता हूं तो पूरा नहीं कर पाता हूं तो वह चाहते हैं कि मैं कुछ काम करूं तो उसको पूरा कर पाऊँ।

नेगी मैम देहरादून से थी कुछ परेशान महसूस कर रही थी खुद को मजबूत करना चाहती हैं और अपनी लेखन प्रतिभा को दुनिया के सामने लाना जाती हैं।  फिर से हम पुराने अपने सभी बड़े ग्रुप में कनेक्ट हो गए।जहाँ पवन सर अपने चित्र पिल्ली को दिखा रहे थे। जिस पर जो कुछ इस तरह से उस पर कविता लिखी थी, 

कुछ रास्ते अलग है तेरे,

 पर हमको एक दूसरे की जरूरत है।........

.................

 तुम भी बदलोगे या फिर से मुझे बदलना है।

डॉ 0 अमिता मैम का समझदार लब्बू,  मनीषा मैम  का लायन सभी खास थे।

शैल्जा मैम ने चिड़ियों की आवाज,बच्चों की आवाज के बारे में अपने चित्र से बात की। अपने चित्र को अपना डर भी बताया लोग क्या कहेंगे इस डर से डरती हूँ।

शायद उनके चित्र ने ये ही बोला होगा 

जब  लोग तुम्हारे खिलाफ बोलने लगे, तब समझ लो तुम तरक्की कर रहे हो।



उसके बाद अन्तिम गतिविधि खास थी जिसमें उस पत्र में जो लिखा था उसको पूरा होते देखना था ।वो चित्र हमारे मन का आइना हमको वो सब दे रहा था जो हमको चाहिये।यह एक पूर्णता का अहसास था।अद्भुत..........।

कोरोना काल में लिखी गयी तनुजा जोशी मैम की सकारात्मक कविता और उनकी सुन्दर आवाज ने सबको आनंद से भर दिया।

 इस तरह दो घण्टे हो गये अपनो के साथ और अपने साथ समय हवा की तरह निकल गया ।जीवन के मीठे अनुभवों की खुशबू देकर।धन्यवाद सुचिता मैम,स्वाती मैम,इमरान सर ,पवन सर ,dream a dream की पूरी टीम और आनन्दम् पाठ्यचर्या................।


Saturday, June 27, 2020

वर्चुअल लैब द्वारा विज्ञान प्रशिक्षण

26 जून, 2020,
विज्ञान शिक्षकों के लिए एससीईआरटी द्वारा आयोजित वर्चुअल लैब के माध्यम से विज्ञान प्रशिक्षण  26 जून से  2 जुलाई तक की शुरुआत हुई।पहला दिन था और यह वर्चुअल लेब में विभाग द्वारा पहली बार ही हो रही थी तो उत्सुकता भी थी कि क्या होने वाला है? मैने रा0इ0का0 जयंती कोठियाड़ा में प्रतिभाग किया। तीन अन्य साथी वहां पर थे तो कुल मिलाकर 4 साथी। शुरुआत में कनेक्टिविटी में थोड़ी परेशानी हुई थी। दीपक बुटोला जी ने प्रयास करके यह समस्या किसी तरह दूर की। एस0सी0ई0आर0टी0 देहरादून से कार्यशाला की औपचारिक शुरुआत की गई।

डॉ0 प्रदीप रावत जी द्वारा ओपन एजुकेशन रिसोर्सेज के बारे में बताया गया जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी थी। इस कार्यशाला कि आज के दिन की सबसे उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई,जो कि आपके साथ जरूर साझा करना चाहूंगी।
यूट्यूब आजकल ऑनलाइन एजुकेशन का प्रचलित माध्यम बना हुआ है, किंतु हम सभी जानते हैं, बच्चों के लिए भटकाव के लिए इसमें कितना कुछ है । जब बच्चे पढ़ने बैठते हैं तो सिर्फ पढ़ते रहे इसके लिए एक उपाय है-टेलीविजन।जिसके के माध्यम से स्वयं प्रभा चैनल पर हर विषय पर स्टडी मटेरियल उपलब्ध है जो कि बिल्कुल नि:शुल्क है।
1. गणित विज्ञान की बात करें तो DTH पर स्वयंप्रभा चैनल संख्या 27, 28 दसवीं कक्षा के विज्ञान विषय के लिए है।
• चैनल संख्या 31 पर NCERT का पूरा पाठ्यक्रम उपलब्ध है,जो कि विज्ञान और गणित विषय के लिए है। JEEE तथा NEET की तैयारी के लिए चैनल संख्या 19, 20 21 और 22 जो कि19 biology ,20-केमिस्ट्री, 21 गणित, 22 फिजिक्स के लिए है।
1. स्वयं प्रभा चैनल को इंटरनेट पर भी देखा जा सकता है जिसका लिंक। Www.nic.in है
2. लिंक पर क्लिक करते ही explore आयेगा फ़िर 32 चैनल की लिस्ट खुलेगी।
3. screen archive पर जाएँ , सभी स्टडी मटेरियल उपलब्ध है।किसी भी विषय पर भी विडियो देखा जा सकता है। 

• दूसरा महत्वपूर्ण स्रोत है e-pathshala जो कि भारत सरकार की वेबसाइट है। जिस पर एनसीआरटी की बुक सीनियर सेकेंडरी तथा स्कूली शिक्षा के लिए उपलब्ध है। 

• अगला स्रोत है Khan Academy स्कूली शिक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विभिन्न वीडियो उपलब्ध है।
• करोना के इस दौर में यह सोच सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करते हुए पंचायत स्तर पर विद्यार्थियों के लिए लगाया जा सकता है। ऐसे सुझाव प्रस्तुत किया गया।
• इसके पश्चात डॉ0 मोहन सिंह बिष्ट जी द्वारा वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए तनाव प्रबंधन पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। जिसे स्लाइड के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुतीकरण बहुत ही रोचक लगा और आसानी से समझने वाला भी था।
• साथ ही एक बात समझ में आई कि तनाव की बात ज्यादा देर तक की जाए तो तनाव उत्पन्न होने की प्रबल संभावना रहती है जो कि वर्तमान में देखा जा सकता था।
• अंत में चर्चित मुद्दे corona के बारे में बताया गया कि पिछले चार-पांच महीनों से जो जानकारी मिल रही है, वैसे ही थी।जो काफी विस्तार से समझाया गया। बहुत कुछ सीखने को मिला और कक्षा से पलायन के कारण भी समझ आया। 1:00 बजे समाप्त होने वाली कार्यशाला 2:15 तक समाप्त हुई और हम सभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मुंह पर मास्क लगाए वापस आ गए।


अगले 4 दिनों का आँखो देखा हाल यदि पढ़ना चाहें तो कमेंट में जरुर बताएं।धन्यवाद😊🙏

Monday, June 1, 2020

एक नई स्किल ::शुरुआती 20 घण्टे

हम कितना कुछ सीखना चाहते हैं गिटार बजाना, हारमोनियम, पियानो बजाना, पेंटिंग स्केचिंग, लेखन,डांस,तैराकी, न जाने कितने ऐसे शौक होते हैं जिन्हें हम पूरा करना चाहते हैं। मुझे यह सीखना है, वह सीखना है, पर हमेशा समय कहां मिल पाता है। यह सोचकर हमारा न जाने कितना समय ऐसे ही निकल जाता है। पिछ्ले कुछ दिनों लॉक डाउन के दौरान बहुत सारी पुस्तकों को समझने का मौका मिला। ऐसे ही एक पुस्तक जॉश कॉफमैन की 'द फर्स्ट 20 आवर्स', जिसमें यह बताया गया कि किसी भी स्किल को सीखने में 20 घंटे का समय देने से आसानी से सीखा जा सकता है।
स्वयं लेखक ने इस नियम से कई सारी स्किल्स सीखी हैं। मेरे दिमाग में कई सारी बातें आई। मुझे हारमोनियम बजाना सीखना है, कोई नई भाषा सीखनी है, पेंटिंग- ड्राइंग सीखनी है।
अंत में काफी सोचने के बाद मैंने सोचा मैं स्केचिंग सीखूगी। बुक में दिए गए पांच सिद्धांतों पर विचार किया। स्केचिंग करनी थी साधन, सीमित पेंसिल और पेपर! पुस्तक में दिये गये 5 सिद्धांत यह थे-
1- लक्ष्य निर्धारण
2-स्किल को छोटे-छोटे कौशल में बांटना
3-जितनी जरुरत हो उतनी रिसर्च
4- रुकावटों को दूर करना
5-20 घंटे का अभ्यास।

पहले सिद्धांत लक्ष्य निर्धारण में हमें यह ध्यान देना होता है कि हमें क्यों सीखना है और कितना सीखना है? इन्हें किसी भी स्किल का बहुत विस्तार होता है। हमें उसमें से एक सीमा का निर्धारण करना होगा। जैसे अगर कोई गिटार बजाना सीखना चाहता है तो वह 4,5 सॉन्ग सेलेक्ट कर ले। जिन पर वह गिटार बजाना सीखेगा। और कितना और क्यों सीखना है? हमें क्या प्रोफेशनल प्रोफेशनल आर्टिस्ट बनना है या फिर हमें यह काम बस शौक के लिए करना है । हम अपने दोस्तों के साथ मौज मस्ती के लिए सीख रहे हैं।लक्ष्य निर्धारित करें। इससे किसी लक्ष्यों का निर्धारण कर सकते हैं। मैंने सोचा कि क्यों न मैं पोर्टरेट स्केचिंग करुँ। मैंने ज्यादा कुछ नहीं सोचा बस यह कि मैं इसको बस 20 घंटे करके देखती हूं। क्या पता यह सच में हो जाए?
2- स्किल को छोटी-छोटी सब स्किल में बांटना-
कोई भी जो कौशल होता है उसकी बहुत सारे कई कौशलों से मिलकर बना होता है।उसमें से कुछ कौशलों के द्वारा हम उस काम को आसानी से कर सकते हैं । उसके बाद मैने जो सोचा यह था स्केचिंग ।स्केचिंग में बहुत कुछ आता है, लेकिन मैंने उसमें से सिर्फ पोर्टरेट पर फोकस किया और उसी पर काम किया।
3-रिसर्च सिर्फ उतनी ही करो जितनी तुम्हें जरुरत हो- स्किल में किया गया अभ्यास रिजल्ट देगा। लेखक दो समूहों के उदाहरण देते हैं ।जिसमें से पहले समूह को लर्निंग बाई डूइंग से पॉट बनाना सीखने को कहा गया दूसरे समूह को किताबें दी गयी और फ़िर पॉट बनवाये गये।रिजल्ट यह रहा कि पहला समूह ज्यादा अच्छे और अधिक संख्या में पॉट बना पाया। मेरे पास कोई मेंटर नहीं था तो मैंने यू टयूब की मदद से थोड़ा बहुत वीडियोज़ देखे और अपना काम शुरू कर दिया।
4-रुकावटों को दूर करना-
यदि 40 मिनट भी समय एक दिन में दें तो 1 महीने में 20 घण्टे का समय हो जाता है ।इस 40 मिनट के दौरान tv ,फोन अन्य किसी भी ऐसी चीज से दूर रहना है जो हमारे फोकस को कम करे।कोशिश ऐसी करें जिससे हमें थकावट महसूस ना हो।जब मैं काम कर रही थी तो कभी पूरा समय नहीं दे पायी तो 20 या 30 मिनट जरुर काम किया,पर लगभग हर दिन अभ्यास किया।
5- 20 घंटे का अभ्यास -
शुरुआती अभ्यास कुछ ऐसा रहा


इस काम को 20 घंटे का समय देना है। जब 20 घंटे अभ्यास के लिए तैयार होते हैं तो हम सोचते हैं कि यदि यह काम होगा तो हम इसको सीख जाएंगे या फिर हमें लगता है कि यह इतना जरुरी नही हैं कि हम इस काम को 20 घंटे का समय दें।इसका मतलब यह काम हमारे लिए इतना जरूरी नहीं है ।इस तरीके से हम यह भी जान सकते हैं कि कौन से हमारे रियल ड्रीम्स हैं, जिन्हें हासिल करना चाहते हैं और कौन से ऐसे हैं जो सिर्फ हम सोचते हैं कि अगर यह सीख दिया होता तो अच्छा होता। 20 घंटे देने के बाद मुझे थोड़ा सा विश्वास आया है कि हां मैं कर सकती हूं। मुझे लगता है कि यह सिर्फ एक शुरुआती बिन्दु है। इसके बाद एक लंबा सफर शुरू होता है। लेकिन यह निश्चित रूप से काम करता है। जब मैं पहले दिन और आज मैं देखती हूं तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है । 20 घंटे में मैने अलग-अलग जैसे बन पाये पोर्टरेट बनाए ।अन्तिम 20 वें घण्टे में जब मैने अभ्यास किया तो मैंने उस महिला की शक्ल बनाई जिसको पहाड़ की बेटी नाम से जानते हैं ,भारत की पहली महिला जिन्होंने एवरेस्ट फतह किया बछेन्द्री पाल!

मैं परफ़ेक्ट नहीं हूँ, एक यात्रा पर हूँ जिसका आनन्द ले रही हूँ और आपके साथ साझा कर रही हूँ।

कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं।आओ! कुछ नया सीखते हैं।

Friday, May 15, 2020

ऑनलाइन शिक्षा::कुछ दबे से सवाल

 आज सुबह-सुबह अपनी गौशाला की तरफ जाते हुए मेरे गांव की दादी जी ने मुझसे कुछ ऐसा सवाल किया-
नानी! तुम भी फोन पर काम दे रही हो बच्चों को ??मैंने बोला, हां, थोड़ा बहुत। वो बोली स्कूल कब तक खुलेंगे, अब तो खुलेंगे ना? इसका जवाब मेरे पास भी ना था। मैंने कहा, शायद जुलाई तक देखो। फिर वह अपने मन की बात पूछने पर आई और बोली जिनके पास फोन नहीं है, वह क्या करेंगे? मुझे अब कुछ समझ आया। उनके 5 पोते पोतियां हैं जो एक ही परिवार से है।
जहाँ पूरे देश में लॉक डाउन के कारण अप्रैल से नये शिक्षा सत्र में बच्चे स्कूल नही जा पा रहे वहीं आज पहली प्राथमिकता दैनिक जरूरतों को पूरा करना है और पड़ोस के घरों में फोन पर ऑनलाइन काम आता होगा तो बच्चों की मांग उठना स्वाभाविक ही है हमें भी फोन चाहिए, चाहे वह परिवार कल की राशन पानी की जुगत में लगा हो। 
यह बात अलग है कि वह ऑनलाइन काम करने में बच्चों का ध्यान कितना है, वह फोन पर आते ही गेम यूट्यूब पर कोई वीडियो सर्च करने में लगे हैं। यह बात स्वयं बच्चे अपने अनुभव से बता रहे हैं कि पढ़ाई के नाम पर आजकल घरवालों से फोन लेना बहुत आसान हो गया है।
कुछ बच्चे जिनके लिए गुरुजनों का आदेश सर्वोपरी होता है। सुबह से शाम तक पूरा दिन उस काम को उतारने में लगे हैं जिसकी उनको एक लाइन तक समझ नहीं आ रही।एक बच्ची अपनी मां के पास आकर शाम को हाथ दबवाती है ,आज पूरे दिन 40 पेज लिखे माँ हाथ दर्द हो गया।
बाल केंद्रित शिक्षा, जीवन के लिए शिक्षा किन-किन सिद्धांतों को लेकर हम शिक्षा को देने की बात करते हैं जहां एक और पूरा विश्व महामारी से जूझ रहा है, एक  ऐसा जीव मनुष्य के अस्तित्व के लिए खतरा बना हुआ है जो दिखाई तक नहीं देता। प्रकृति मनुष्य को उसके अस्तित्व के असली रूप का परिचय दे रही है और हमने बच्चों को आज भी उन्हें कागजों के ढेर में दबा कर रखा हुआ है। कुछ स्कूलो के बच्चे कंप्यूटर स्क्रीन के सामने स्कूल ड्रेस में बन्द कमरे में बैठे पढ़ रहे हैं न शारीरिक स्वास्थ्य है न मानसिक स्वस्थ्य कैसी शिक्षा है ये?
हमें एक शिक्षक को पुनः विचार करने की आवश्यकता है कि आखिर हम शिक्षा दें किसके लिए रहे हैं । अप्रैल-मई का सिलेबस हम फोन पर उतरवाकर ही पूरा करना चाह रहे हैं। हमारी प्राथमिकता क्या है? बच्चा या पाठ्यक्रम??
समान शिक्षा समान अवसर उनके लिए कहाँ है जो प्रश्न सुबह-सुबह आज पूछा गया।शिक्षक की भूमिका सहयात्री के रूप में हो,प्रकृति आज पूरी दुनिया के लिए प्रत्यक्ष आदर्श शिक्षक के रूप में प्रकट हुई है।
हमारा दायित्व बनता है कि हम साथ-साथ सीखते हुए बच्चों का साथ दें। दिया जाने वाला काम फोन की स्क्रीन के सामने बैठने वाला ना होकर कुछ ऐसा हो कि वह अपनी मां द्वारा जंगल से लायी गयी घास की पत्तियों के प्रकार देखें। वह गाय को घास खाते देखे जुगाली लगाते देखें।घर पर बनने वाला भोजन कितनी मेहनत से बनता है ,घर पर कितना लीटर पानी लगता है?
मेरी मां सारा दिन कितने किलोमीटर चलती है?मेरी दादी को कितनी कहानियां आती हैं? मेरे दादाजी लोगों के मकान कैसे बनाते हैं? हल कैसे लगाते हैं? मिट्टी के रंग देखो । मिट्टी की बनावट देखो ।देखो इस महामारी में अपने परिवार अपने गांव की समस्याएं ।जो लोग आगे आ रहे उनकी भूमिकाएं। उन सबके बीच बच्चे अपने जीवन अस्तित्व और पर्यावरण में आपसी तालमेल और प्रकृति का सम्मान सीखें।
ऐसा कौन सा विषय है जो बच्चा इस समय नहीं सकता। सच्ची शिक्षा नहीं ले सकता। यह तभी संभव हो शायद जब बच्चे को मोबाइल स्क्रीन और उसको कागज के टुकड़ों पर उतारने से फुर्सत मिल पाए। शिक्षक को दुश्मन की तरह दिख रहा है जो सारा दिन उसको एक बोझ तले दबाये हुए हैं।इसे ऐसे अवसर के रूप में देखा जाए, जहां छात्र और शिक्षक जीवन से जो कुछ भी सीख रहे हैं, उसको समूह में साझा करें। बालक है तो हमारी शिक्षा है। आओ एक बार उसके लिए विचार करें।

आज हम सभी इस एक नई समस्या से जूझ रहे हैं कमेंट कर अपने विचार जरुर दें जिससे हम सभी मिलकर एक निष्कर्ष तक पहुँच पायें।

Saturday, May 2, 2020

भारतीय संविधान और आजीविका का अधिकार :व्याख्यान सुदर्शन ठाकुर

 अंबेडकर जयंती व्याख्यानमाला के क्रम में 'सामाजिक विज्ञान स्वैच्छिक शिक्षक मंच पिथौरागढ़' द्वारा भारतीय संविधान और आजीविका का अधिकार विषय पर व्याख्यान  आयोजित किया गया था,जिसमें वक्ता थे सुदर्शन ठाकुर जो कि प्रदान संस्था मध्य प्रदेश में कार्यरत हैं। इनके द्वारा आजीविका,सामाजिक जागरुकता और जेंडर के मुद्दों पर विभिन्न कार्यक्रमों को संचालित किया गया है। 'प्रदान संस्था 'भारत के पिछड़े और गरीब समूहों के बीच निर्धनता निर्धनता उन्मूलन के लिए कार्य कर रही है।
  इसकी नींव रमन मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्तकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता दीप जोशी और विजय महाजन द्वारा इस संस्था की नींव रखी गई थी। 
सुदर्शन ठाकुर जी व्याख्यान की शुरुआत में आजीविका का परिचय देते हैं और बताते हैं कि अपनी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मनुष्य जो भी काम करता है वह आजीविका कहलाती है।
हमारे संविधान में स्पष्ट रूप से आजीविका के लिए कुछ नहीं है किंतु विभिन्न अनुच्छेद, राज्य के नीति निदेशक तत्व तथा सुप्रीम कोर्ट के न्यायों की व्याख्या करने पर प्रत्येक व्यक्ति अपनी आजीविका का अधिकार प्राप्त कर सकता है। 
इसमें उन्होंने कुछ अनुच्छेद की व्याख्या  की जैसे अनुच्छेद 14, 15 ,16, 24 और अनुच्छेद 39 ।सुदर्शन जी स्पष्ट करते हैं कि पेंशन, जनकल्याणकारी तथा जीवनयापन की सुविधाएं इसी के तहत भारतीय नागरिकों को प्राप्त है। आजीविका को महत्वपूर्ण शब्दों में स्पष्ट किया कि आजीविका  सिर्फ धन कमाने के लिए नहीं बल्कि अपनी क्षमता के अनुरूप समाज में योगदान तथा अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के रूप में देखा जाना चाहिए।
आजीविका की निम्न पांच पहलुओं की व्याख्या करते हुए कहते हैं कि 
1)संपति- किसी मनुष्य के पास भौतिक(जंगल,जमीन) व सामाजिक( सुविधाएं) संपति हैं।
2)पहुँच-
कहां तक आदमी कितनी योजनाओं के लाभ ले सकता है?
3)क्षमता-उसकी अपनी क्षमताएं क्या हैं?
4)अभिवृति-
उसकी सोच कैसी है? जैसे उसके पास खेत हैं पर खेती करना पसंद नही।
5)आश्ववासन -
उसको भरोसा होना चाहिए कि जो भी उत्पादन हो उसका बाजारीकरण हो पाएगा या फिर कोई नुकसान होने पर मुआवजे की व्यवस्था होगी।
प्रदान संस्था के बारे में वे बताते हैं की यह 7 राज्यों में कार्य कर रही है और स्थानीय जरूरतों के अनुसार प्राथमिकताएं तय की जाती हैं।
  covid 19 के बाद पूरी सामाजिक दिशा और दशा बदली है। हमारे सामने नए प्रश्न खड़े कर दिए हैं कि गांव में पड़ने वाले दबाव का हम क्या करेंगे? जो युवा वापस आकर तनाव में हैं उनके लिए क्या कर सकते हैं? 
इस वक्त गांव की तरफ से मांग होनी चाहिए कि उनके जंगल और जमीन पर निवेश हो। 
गांव में कुटीर उद्योगों को स्थापित करना होगा।
इन सब के बावजूद अभी जो मुख्य समस्याएं हैं, प्राथमिकता वही है पब्लिक हेल्थ ,साफ-सफाई ,असंगठित क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूरों को किस प्रकार चिह्नित किया जाए?
 जिस प्रकार लॉक डाउन के इस दौर में हम इंटरनेट के माध्यम से बातचीत कर पा रहे हैं उसी प्रकार गांव में रोजगार के अवसर इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध कराए जाने पर काम करना होगा।
शिक्षकों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने बताया कि संविधान को पढ़ने और समझने की आवश्यकता है बच्चों तक यह गतिविधि, सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के रूप में पहुंच सकता है। अंत में उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात कही कि "पढ़ाना बंद कर चर्चा शुरू करें।"

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन पिथौरागढ़ से शोज़ाब अब्बास ,रुद्रप्रयाग से रिचा जी और सामाजिक विज्ञान स्वैच्छिक शिक्षक मंच पिथौरागढ़ का हार्दिक आभार।😊


Friday, April 24, 2020

विश्व पुस्तक दिवस::बातें किताबों की

विश्व पुस्तक दिवस 23 अप्रैल,
आज सुबह-सुबह एक पुस्तक का सारांश बच्चों के साथ ऑनलाइन साझा किया।उनको जो बात पुस्तक में अच्छी लगे वह बताने के लिए कहा उसके बाद सौरव का जवाब कुछ ऐसा था-
शुरुआत की 14 पंक्तियाँ उसकी अपनी थी बिल्कुल अपने मन के भाव। इसमें भाषाई त्रुटि के साथ-साथ अशुद्ध वर्तनी है, सच है। लेकिन उसके सपनों ने जो उड़ान भरी है,वह उसकी भावों से स्पष्ट थी। यह एक पुस्तक की ताकत है,जो बच्चे के विचारों में यह आत्मविश्वास ला पाया कि बच्चा अपने अवलोकन को यह शब्द दे पाया।शायद अपने भविष्य के लिए एक सोच.......।शाम 5:00 बजे अजीम प्रेमजी फाउंडेशन रुद्रप्रयाग की तरफ से पिथौरागढ़ के शिक्षक तथा कवि महेश पुनेठा जी का ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किया गया था।जिसमें पूरे प्रदेश भर से शिक्षक जुडे थे। पुनेठा जी अपने दीवार पत्रिका अभियान, शैक्षिक सरोकारों को समर्पित पत्रिका शैक्षिक' दखल 'के संपादन और अपने लेखों, कविताओं ,अपनी पुस्तक' शिक्षा के सवाल' द्वारा हम सबके बीच एक परिचित हस्ती हैं। उनका व्याख्यान शुरू हुआ और उन्होंने अपने जीवन से शुरू करते हुए पुस्तकों को अपनी संस्कृति में शामिल बताया। कुछ ऐसा कैसे हो की पुस्तकें हमारी आदतों में शुमार हो जाए।अपने जीवन के अनुभवों से बताते हैं कि जब मैं पुस्तकों का अध्ययन नहीं करता था तो मैं बच्चों को पढ़ाता था किंतु पुस्तकों के अध्ययन के बाद मैं बच्चों को पढ़ने लगा,अध्ययन ने यह दृष्टिकोण दिया। एक शिक्षक के लिए आवश्यक है कि उन्हें बाल मन की समझ हो, शिक्षा की समझ हो कि आखिर शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य क्या है? क्या रोजगार पाना, परीक्षा पास करना या इससे भी कहीं अधिक कुछ और है?? इसके अलावा शिक्षक का कल्पनाशील होना बेहद जरूरी है और इन सभी गुणों का विकास अध्ययन के द्वारा संभव है। अध्ययन से एक दर्शन से मिलता है, जो जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम करता है। उन्होंने अपनी बातचीत में कुछ लेखकों का जिक्र किया जैसे जान होल्ड, ए एस नील।नील का नाम सुनते ही मैं उनके विद्यालय जा पहुंची 'समरहिल' अनोखे प्रयोग हुए थे वहां ।यह पुस्तक मुझे अजीम प्रेमजी फाउंडेशन रुद्रप्रयाग से पढ़ने को मिली थी। उसको पढ़ने के बाद तो मैं दो या तीन बार सपने में उस विद्यालय जा चुकी हूँ। पुनेठा जी की बात आगे बढाते है और शिक्षा के एक अवधारणा को स्पष्ट करते हुए समझाते हैं, किस प्रकार ज्ञान सृजन पहले चरण अवलोकन से आगे बढ़ता है। अवलोकन प्रत्यक्ष भी होता है और जहां हमारी पहुंच नहीं होती वहां पुस्तकें हैं जिनके माध्यम से हम वहां अवलोकन कर सकते हैं। इस प्रकार ज्ञान की प्रक्रिया का चरण आगे बढ़ते हैं और एक आलोचनात्मक विवेक का विकास होता है।
बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ पुस्तकों की उपलब्धता से पढ़ने की संस्कृति विकसित की जा सकती है। अपने अनुभव बताते हैं कि इसके लिए हमें तात्कालिक उद्देश्य छात्रों के सामने देने होंगे। जिससे बच्चों के अंदर रुचि जिज्ञासा उत्पन्न हो सके जैसे दीवार पत्रिका में बच्चे लिखने के लिए पढ़ना शुरू करते हैं और धीरे-धीरे पढ़ना उनकी आदत में शुमार हो जाता है ।
मुझे ध्यान आया जब कक्षा 8 में मैने बच्चों को कवि चंद्रकुवँर बर्त्वाल पर नाटक बनाने के लिए बोला था तो कैसे साहिल दौड़कर मेरे कमरे से जीवनी पर लिखी पुस्तक उठा लाया था । सारे कक्षा के बच्चे उस पुस्तक पर झपट पड़े थे। जिसके लिए फिर मुझे समूह बनाने पड़े, यह तात्कालिक उद्देश्य का ही परिणाम था। उनको नाटक प्रस्तुत करना था तो पढ़ना बहुत जरूरी हो गया था। इसके लिए वे इतने उत्सुक दिख रहे थे।
पुनेठा जी आगे बताते हैं कि रुचि विकसित करने के लिए पुस्तकालयों को गतिविधि केंद्र बनाना होगा।कक्षा शिक्षण के दौरान पुस्तकों पर चर्चा ,पुस्तक में कोई रोचक किस्सा साझा करने से निश्चित रूप से छात्रों में पुस्तकों के लिए आकर्षण बढ़ता है।
           अजीम प्रेमजी फाउंडेशन पुस्तकालय रुद्रप्रयाग 

कुछ प्रश्नों के जवाब में वे बोले कि इंटरनेट इस जमाने में हम भी यदि हम अपने घरों पर रोचक पुस्तकों का कोना रखें तो बच्चे उनसे प्रेम करने लगते हैं। यद्यपि यह उन पर लादी न जाए बच्चे अपने पसंद से पढ़ना शुरू करें। पाठ्यक्रम से बाहर की पुस्तकें भी जीवन के लिए मूल्य विकसित करते हैं। यह समाज बच्चों में संवाद के द्वारा विकसित की जा सकती है या प्रत्यक्ष उदाहरण द्वारा भी हो सकती है। क्योंकि जो छात्र बाकी किताबें पढ़ते हैं उनकी समझ भाषा की अभिव्यक्ति और निश्चित रूप से परीक्षा फल भी सकारात्मक होता है ।क्या बच्चे की मूल संरचना के साथ छेड़छाड़ करना ठीक है? इस प्रश्न के जवाब में वे कहते हैं कि शुरुआत में बिल्कुल नहीं ।जब वह आत्मविश्वास से लिखने लगे तो लेखन के लिए सुझाव भी उसी से संबंधित कुछ पढ़ने के लिए देकर दिए जाने चाहिए। जिससे मैं स्वयं अपने विकास की राह जान सके। दीवार पत्रिका के बारे में बताते हैं कि उनके विद्यालय में जब छात्रों की वर्तनी संबंधी त्रुटियां होती थी तो उसको शुद्ध-अशुद्ध दोनों रूप में प्रस्तुत किया जाता था। उनके विद्यालय में छात्र एक-दूसरे की त्रुटियां देखते थे किंतु त्रुटियाँ विकास की प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए।पुनेठा जी की बातचीत इसी तरह से कई पुस्तकों के साथ कई व्यावहारिक अनुभव को लिए थी।जो हमारे लिए विश्व पुस्तक दिवस पर यह अनमोल अनुभव की पुस्तक के समान उपहार सा था जैसे एक पुस्तक स्वयं में लेखक के दशकों के अनुभव का संग्रह होती है जो हमें सहज से प्राप्त हो जाता है।।
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से रिचा जी, सोनिया जी और करन जी द्वारा मुझे इस मीटिंग की जानकारी प्राप्त हुई थी इसके लिए मैं इन साथियों का और रुद्रप्रयाग APF केंद्र का हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं।

Tuesday, April 21, 2020

भारत का संविधान और स्त्री पुरुष समानता के प्रश्न::कमला भसीन

अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सामाजिक विज्ञान स्वैच्छिक मंच पिथौरागढ़ की तरफ से 21 अप्रैल 2020 को लेक्चर सीरीज के अन्तर्गत व्याख्यान आयोजित किया गया था। जिसमें ऑनलाइन मीटिंग के माध्यम से उत्तराखंड के लगभग डेढ़ सौ से अधिक अधिकारी, शिक्षक साथी और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के कार्यकर्ता शामिल हुए ।विषय था 'भारत का संविधान और स्त्री पुरुष समानता के प्रश्न' जिसमें वक्ता थी नारीवादी सामाजिक कार्यकर्ता - कमला भसीन। जो स्त्री-पुरुष समानता शिक्षा गरीबी उन्मूलन मानव अधिकार और दक्षिण एशिया में शांति जैसे मुद्दों पर 1970 से लगातार सक्रिय है। अपने लिखे गीतों,नारों और लेखन तरह सोशल मीडिया के माध्यम से सभी सभी उनसे प्रेरणा लेते हैं।
रुद्रप्रयाग में झमाझम बारिश के बीच कमला भसीन को सुनना बहुत ही रोचक अनुभव था। सबसे पहले कमला जी द्वारा भारतीय संविधान की विशेषताओं और संघर्षपूर्ण जीवन से उच्च पद पर पहुंचने की अंबेडकर जी की जीवन यात्रा और योगदान के बारे में बताया। समाज में नारी तथा संविधान उनके अधिकारों के बारे में बातचीत करती हैं। शुरुआत अपने घर से करती हैं और बताती हैं कि कैसे पुरुषसत्ता घर-घर में विद्यमान है। हम समाज की बात तो बाद में करें, किस प्रकार से गुस्सा करना ,हाथ चलाने का अधिकार पिता का होता है। बड़े-बड़े निर्णय पर अधिकार पिता का ही होता है ।घर का बंटवारा होता है तो भाइयों के बीच और बेटी का कन्यादान कर दिया जाता है। क्या कन्या कोई गाय बकरी या वस्तु है ?हमारा संविधान हर नागरिक को जन्म से स्वतंत्रता का अधिकार देता है। यह सच है कितने लोगों ने संविधान को पढ़ा है और अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझने की कोशिश की है। कितने परिवारों ने अपने बच्चों को संविधान पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है? उनका एक प्रश्न वाकई हमारे सामने था ।उन्होंने इस तरफ भी इशारा किया सबसे ज्यादा किस प्रकार असमानता,हिंसा शिक्षित समाज में अधिक पाई गई है।शिक्षा डिग्री नहीं है तो शिक्षा वह है जो हमें सोचने की आजादी दे।उन्होंने बताया कि विश्व की आधी जनसंख्या जो कि नारी है कितने कम प्रतिशत में शीर्ष पदों पर कार्य कर रही है यह भारत में ही नहीं विश्वव्यापी समस्या है ।इन सभी बातों को समझ में लाने की एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी घर परिवार के साथ-साथ शिक्षकों की भी बन जाती है।
 एक प्रश्न के जवाब में बताती है कि विद्यालयों में ड्रेस से लेकर बैठने की व्यवस्था तक क्या असमानता पैदा नहीं करती ?उन्होंने बताया कि क्या हम सेक्स और जेंडर को पहले समझ पाते हैं? अधिकतर नहीं।
इसको उन्होंने इसको उन्होंने इस प्रकार से बताया कि सेक्स शारीरिक है यानी ऐसा फर्क जो औरत और मर्द के जननांगों में और उनसे जुड़े कार्यों में दिखाई देता है। यह प्रकृति के देन है।जिसको बदला नहीं जा सकता।जेंडर सामाजिक सांस्कृतिक व्यवस्था है, जो मनुष्य ने बनाई है कि स्त्री कैसे व्यवहार करेगी पुरुष कैसे, इनकी भूमिका है क्या होंगी। जेंडर बदला जा सकता है क्योंकि यह समाज ने निर्धारित किया है।यह मनुष्य ने बनाया है। उन्होंने उत्तराखंड राज्य के निर्माण में उत्तराखंड की महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान का भी जिक्र किया।
विद्यालयों में कितनी बार हम जाने-अनजाने जेंडर को लेकर भूमिकाएं निर्धारित करते हैं और यह चलता ही जाता है। स्वागत, स्वागत में प्रार्थना में लड़कियों को आगे रखना, हमारे बुलाने का तरीका 2 लड़के और 2 लड़कियां आओ।भारी काम हो तो लड़के आओ जबकि घर पर घास का बोझ लडकियां ही उठाती हैं।इन असमानताओं को दूर करने के एक शिक्षक के रूप में विद्यालयों में हमें कितने अवसर मिलते हैं।ऐसे अनेक सवालों के साथ दिल्ली से उत्तराखंड के सुदूर पहाडियों तक पहुँचती यह बुलंद आवाज हमें उद्वेलित कर गयी। 
इस कॉन्फरेंस की जानकारी मुझे अजीम प्रेमजी फाउंडेशन पिथोरागढ से शोज़ाब अब्बास और रुद्रप्रयाग से रिचा जी और शफीक जी द्वारा दी गई थी इन साथियों का हार्दिक आभार।😇